बांस की उपयोगिता के बारे में लोगों को जागृत करने एवं बांस उद्योगों को बढ़ावा देने का हम सब संकल्प लें
आई विटनेस न्यूज 24, गुरुवार 19 सितम्बर,विश्व बांस दिवस के अवसर पर पिछले 5 वर्षों से बांस पर शोध कार्य कर रहे डॉ. विकास जैन ने बताया कि बांस की 1200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं बांस के यंग शूट अर्थात तने में अनेक औषधीय गुण पाए जाते हैं एवं इसके अनेक नोबेल प्रोडक्ट भी तैयार किया जा सकते हैं जिन्हें औद्योगिक स्तर पर मार्केटिंग करके अच्छा खासा व्यापार भी किया जा सकता है वर्तमान में इसकी जागरूकता की आवश्यकता है डॉ. जैन ने अपने अनुसंधान में बांस के यंग शूट्स को फोर्टिफिकेशन करके उसके प्रोडक्ट जैसे बिस्कुट,नमकीन, नूडल्स,अचार,सलोनी आदि तैयार की है और इसके अनेक फायदो के बारे में विस्तार से बताया है।
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर
बांस की टहनी (Bamboo shoots) को कई देशों में खाया जाता है। यह बांस के पेड़ के साथ एक किनारे पर उगता है जोकि काफी नरम होता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स और फाइबर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। इसे सब्जी, सलाद, सूप आदि के रूप में खाया जाता है। इसे पकाने से पहले इसे एक दिन पानी में भिगोकर रखना होता है ताकि यह ज्यादा सॉफ्ट हो सके।जानते हैं इससे आपकी सेहत को क्या-क्या फायदे होते हैं।
बीमारियों के लिए उपचार
बांस के कोंपलों में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन ए, ई, बी6, मैग्निशियम, कॉपर जैसे पोषक तत्व होते हैं। जिसके कारण आयुर्वेद में बांस को कई बीमारियों के लिए उपचार के तौर पर प्रयोग में लाया जाता है। Bambusa vulgaris Schrad. (स्वर्णवंश, पीतवंश)- यह लगभग 18 मी तक ऊँचा, मध्यमाकार का होता है। इसका तना पोला या मुलायम तथा पीले रंग का होता है। इसकी पत्तियां भाला के आकार की, रेखा की हुई तथा आगे की तरफ पर नुकीली होती है। यह प्रकृति से मीठी, थोड़ी कड़वी और ठंडे तासीर की होती है। यह बुखार के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करती है। इसकी नई शाखाएं तथा जड़ मूत्र संबंधी बीमारी में फायदेमंद होती है। वंशलोचन भी कड़वा, मधुर, ठंडे तासीर का, रूखा, वात कम करने वाला, पौष्टिक, वीर्य या सीमेन बढ़ाने वाला, स्वादिष्ट, रक्त को शुद्ध करने वाला और शक्ति बढ़ाने वाला होता है। यह प्यास, खांसी, बुखार, क्षय, रक्तपित्त यानि नाक या कान से खून बहने की बीमारी , कामला या पीलिया, कुष्ठ, पाण्डु या एनीमिया,मूत्रकृच्छ्र या मूत्र संबंधी बीमारी, अपच तथा जलन कम करने में मदद करता है। यह उल्टी, अतिसार या दस्त, प्यास, जलन या गर्मी, कुष्ठ, कामला या पीलिया, रक्तछर्दि या खून की उल्टी, फूफ्फूस में सूजन, खाँसी, सांस लेने में तकलीफ, मूत्रकृच्छ्र या मूत्र संबंधी बीमारी, मुखपाक (Stomatitis),बुखार या फीवर, आँख संबंधी रोग एवं सामान्य कमजोरी में फायदेमंद होता है। बांस की जड़ प्रकृति से ठंडी, विरेचक या शरीर से मल-मूत्र निकालने में मददगार, मूत्र संबंधी बीमारी में लाभकारी तथा शक्ति बढ़ाने में मददगार होती है।
वजन कम करने में मदद
इसके पत्ते भी प्रकृति से ठंडे, आँख के बीमारी में लाभकारी और बुखार से राहत दिलाने में सहायता करते हैं। बांस की कोपलों में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम पाई जाती है, इसके सेवन से हड्डियाँ एवं दांत मजबूत होते हैं। बांस से दातुन करने पर मुंह की दुर्गंध और दांत के दर्द दूर हो जाते हैं। करील से बनी सब्जी, मुरब्बे, और अचार के सेवन से वजन कम करने में मदद मिलती है, साथ ही कोलेस्ट्रोल भी घटता है और मधुमेह भी नियंत्रित होता है।


