राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, शनिवार 24 जनवरी, बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर में वीणा वादिनी ज्ञान की देवी माँ सरस्वती जी का पूजन अर्चन हवन का आयोजन विद्यालय परिसर में वैदिक मन्त्रोंउच्चारण के साथ किया गया प्रधानाचार्य ब्रजेन्द्र झारिया ने उपस्थित भैया बहनों को बसंत पंचमी पर्व पर प्रकाश डालते हुए बताया की हिन्दू धर्म में 16 ,संस्कारों का वर्णन मिलता है!जिनमें से एक महत्वपूर्ण संस्कार है विद्यारंभ संस्कार इसका शाब्दिक अर्थ है! शिक्षा की शुरुआत यह संस्कार बच्चों को औपचारिक रुप से पढ़ाई - लिखाई के लिए तैयार करने का कार्य करता है! कुछ जगहों पर इसे अक्षराभ्यास, अक्षरारंभ या हस्ताक्षर संस्कार भी कहा जाता है! इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन में यह भाव स्थापित करना है! की विद्या केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि जीवन की सबसे पवित्र साधना है! यह संस्कार बच्चों को ज्ञान के महत्व से परिचित कराता है! और उसे शिक्षा के प्रति सम्मान और लगन पैदा करता है!शास्त्रों में कहा गया है कि विद्यारंभ संस्कार करने से बच्चों की बुद्धि तेज होती है! उसकी सीखने की क्षमता बढ़ती है! और जीवन में कभी शिक्षा में रुकावट नहीं आती है!इस दौरान विद्यालय परिवार से श्रीमती वंदना ठाकुर, हेमलता नामदेव, दुर्गा नामदेव, अरविन्द झारिया,श्रीमती दीपमाला ठाकुर, रुकमणी ठाकुर, लोचन प्रसाद झारिया, भूमि कछवाहा सहित भैया बहन उपस्थित रहे!

