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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने किया जिला जनजाति छात्र संसद का आयोजन


 आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 19 फरवरी,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद डिंडोरी जिले के द्वारा रानी अवन्ति बाई स्टडी सर्किल के माध्यम से मेकलसुता महाविद्यालय में जिला जनजाति छात्र संसद का आयोजन किया गया जिसमें जिले समस्त महाविद्यालय से जनजाति छात्र छात्राओं ने सहभागिता की,जनजाति छात्र संसद का उद्देश्य जनजाति समाज में शिक्षा,स्वास्थ्य ,स्वावलंबी कैसे बने।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद महाकोशल प्रांत के प्रान्त जनजाति प्रमुख/डिंडोरी जिला संगठन मंत्री अमन अठनेरिया जी ,मेकलसुता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ बिहारी लाल द्विवेदी जी,प्रांत कार्यकारिणी सदस्य प्रीति मरकाम जी,प्रांत कार्यकारिणी सदस्य/डिंडोरी नगर मंत्री दीपेन्द्र जोगी,नगर सह मंत्री दीपक बर्मन जी,भाग संयोजक विशाल ओबेरॉय जी उपस्थित रहे।


कार्यक्रम का संचालन डिंडोरी नगर सह मंत्री दीपक बर्मन जी ने करते हुए बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा दिल्ली में अखिल भारतीय जनजाति छात्र संसद का आयोजन 9 मार्च को होना है जिसके निम्मित यह जिला संसद का आयोजन किया गया है।

प्रांत कार्यकारिणी सदस्य दीपेंद्र जोगी ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सन 1949, से लगातार छात्र हित को लेकर काम करते आ रहा है,आरण्यक, ग्राम्य और नगरीय जीवन शैलियों को एक सूत्र में पिरोने वाली भारतीय संस्कृति का सांस्कृतिक प्रतिनिधित्वकर्ता भारत का जनजातीय समाज ही है, जिसका अपना एक गौरवशाली इतिहास और सामाजिक संगठन है, जिसकी समृद्ध परंपराएँ और गहरी आध्यात्मिक चेतना हमें उनसे बहुत कुछ सीखने के लिए प्रेरित करती है।


प्रांत जनजाति प्रमुख/डिंडोरी जिला संगठन मंत्री अमन अठनेरिया जी ने बताया कि जिला छात्र संसद का आयोजन जनजाति क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबी के लिए क्या अवसर है उन मुद्दों पर चर्चा कर चयनित अच्छे वक्ता को दिल्ली भेजा जाएगाजनजातीय लोग कभी दिखावा नहीं करते, उनकी सरलता-सहजता मन मोह लेती है। जनजातीय समाज की खानपान की शैली बीपी-शुगर जैसी लाइफ स्टाईल से जुड़ी बीमारियों से दूर रखती है।   जनजातीय छात्र संसद  गौरवशाली अतीत पर आयोजित यह कार्यक्रम जनजातीय समाज के गौरव को पूरे समाज के सामने लाने में मील का पत्थर साबित होगी।

मेकलसुता प्राचार्य डॉ बिहारी लाल द्विवेदी जी ने बताया कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह सोचकर गर्व होता है कि अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म जनजातीय समाज में हुआ। अपने देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय समाज में प्रारंभ से रही है। शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह, गुण्डाधूर जैसे अनेक महान नायकों ने अपना बलिदान दिया। पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण बहुत आवश्यक है। जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया हैै, जो आज भी अनुकरणीय है। जनजातीय समाज में प्रकृति की पूजा की जाती है। पूर्वीं छत्तीसगढ़ में साल के पेड़ में जब फूल आते है तो सरहुल पर्व मनाया जाता है।


एबीवीपी के जिला प्रमुख डॉ विकास जैन जी ने कार्यक्रम में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। वास्तव में जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है। भगवान बिरसा मुण्डा का शौर्य हमें हमेशा जीवन में साहस की राह दिखाता है।


प्रांत कार्यकारिणी सदस्य प्रीति मरकाम जी ने बताया कि संग्राम में जनजातीय समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा हैै। इस समाज में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया जिन्होंने 1857 क्रांति के पहले ही अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष की शुरूआत की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को बड़ा नुकसान जनजातीय क्षेत्रों में हुआ, अनेक मौकों पर उन्हें मजबूर होकर पीछे हटना पड़ा।


Ashish Joshi

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ASHISH JOSHI | आई विटनेस न्यूज़ 24 के संचालक के रूप में, मेरी प्रतिबद्धता हमारे दर्शकों को सटीक, प्रभावशाली और समय पर समाचार प्रदान करने की है। मैं पत्रकारिता की गरिमा को बनाए रखते हुए हर खबर को सच के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूँ। आई विटनेस न्यूज़ 24 में, हमारा लक्ष्य है कि हम समाज को सशक्त और जोड़ने वाली आवाज़ बनें।