आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 5 दिसम्बर,जिले के परिवहन विभाग में स्मार्ट चिप कंपनी के कथित कंप्यूटर ऑपरेटर पंकज डेहरिया की निरंतर सक्रियता, विभागीय सिस्टम और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मध्यप्रदेश में स्मार्ट चिप कंपनी का अनुबंध सितंबर 2024 के बाद समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद डिंडोरी आरटीओ कार्यालय में कंपनी से जुड़े बताए जा रहे व्यक्ति की दखल अब भी जारी है।
जिला परिवहन कार्यालय में शासन के परमानेंट तीन कर्मचारी आरटीओ अधिकारी, एक लिपिक (बाबू) और एक चपरासी—मौजूद हैं, इसके बावजूद एक गैर शासकीय व्यक्ति द्वारा पूरे कार्यालयीन कामकाज को संभालना विभागीय क्षमता और नियमानुसार कार्य विभाजन पर प्रश्नचिह्न है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंकज डेहरिया न सिर्फ काउंटर का काम संभालते दिखते हैं, बल्कि परिवहन अधिकारी की अनुपस्थिति में फाइलों, प्रकरणों और चेकिंग जैसी कार्रवाई में भी अग्रिम पंक्ति में नजर आते हैं।सूत्रों के मुताबिक, परिवहन कार्यालय से जुड़ा अधिकांश काम इनके इशारे पर ही संचालित होता है, जो यह संकेत देता है कि आउटसोर्स/कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था खत्म होने के बाद भी इन्हें अनौपचारिक रूप से फैसलों पर असर डालने की खुली छूट मिली हुई है?
जिले की महत्वपूर्ण बैठकों, कलेक्टर के समक्ष होने वाली समीक्षाओं तथा परिवहन से जुड़ी समन्वय बैठकों में विभाग का प्रतिनिधित्व भी यदि एक गैर शासकीय व्यक्ति कर रहा है, तो यह सरकारी सेवा आचरण एवं गोपनीयता नियमों की खुलेआम अवहेलना की श्रेणी में आता है।पंकज डेहरिया जैसे गैर शासकीय/कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो चुके व्यक्ति का शामिल होना प्रशासन की कार्यशैली और डेटा सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।यह स्थिति न सिर्फ सेवा नियमों, बल्कि नागरिकों के लाइसेंस, वाहन रजिस्ट्रेशन, जुर्माना आदि से जुड़े संवेदनशील डाटा की गोपनीयता को भी खतरे में डाल सकती हैl
लगातार कलेक्टर और परिवहन अधिकारियों के बदलने के बावजूद पंकज डेहरिया की स्थिति ‘जहाँ के तहां’ बने रहना संकेत देता है कि या तो विभाग आंतरिक रूप से उन पर अत्यधिक निर्भर हो चुका है या फिर ऊपरी स्तर से मौन सहमति के साथ उन्हें संरक्षण प्राप्त है।


