राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट,
आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 27 फरवरी,मध्यप्रदेश में आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बस ऑपरेटरों और सड़क परिवहन विभाग के एक क्लर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि 16 बसों का रोड टैक्स वर्षों तक जमा नहीं किया गया, जिससे सरकार को करीब 9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
आर्थिक अपराध शाखा की जांच में सामने आया है कि बस संचालक संजय केशवानी और साधना केशवानी के नाम पर 16 बसें पंजीकृत थीं। ये बसें
डिंडोरी,
जबलपुर,
शहडोल,
मंडला और
बालाघाट के आरटीओ कार्यालयों में रजिस्टर्ड थीं।
आरोप है कि वर्ष 2006 से 2025 के बीच इन बसों का रोड टैक्स जमा नहीं किया गया, जबकि संबंधित आरटीओ से नियमित रूप से फिटनेस सर्टिफिकेट और अन्य परमिट लिए जाते रहे।
जांच में यह भी सामने आया कि 2006 में बसों को कागजों में स्क्रैप दिखा दिया गया था, लेकिन बसें कथित रूप से सड़कों पर व्यावसायिक रूप से चलती रहीं।
मामले में डिंडोरी में पदस्थ आरटीओ क्लर्क पुष्प कुमार प्रधान पर आरोप है कि उन्होंने बस संचालकों को विभागीय कार्रवाई से बचाने में मदद की। कर रिकॉर्ड से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें दफ्तर से गायब हो गईं, जिसके चलते सरकार को लगभग 9 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
शिकायत मिलने के बाद EOW ने दोनों बस ऑपरेटरों और आरटीओ क्लर्क के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एजेंसी अब दस्तावेजी साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है।
यह मामला न सिर्फ टैक्स चोरी का है, बल्कि विभागीय मिलीभगत के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। अब देखना होगा कि जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।


