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अनूपपुर और डिंडोरी में पर्यटन विकास के प्रयास,बीजापुरी और उमर गोहाना का उभरता आकर्षण


 आई विटनेस न्यूज 24, मंगलवार 17 फरवरी, अनूपपुर और डिंडोरी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमोद गायकवाड़ और अविनाश तांडिया लगातार कई कंपनियों के साथ मिलकर कला ग्राम बीजापुरी न 01 में व उमर गोहाना में लगातार पर्यटन के क्षेत्र में प्रयास कर रहे हैं। ये दोनों जिले मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित हैं और अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं ।

अनूपपुर में पर्यटकों के लिए कई आकर्षक स्थल हैं, जैसे कि कपिलधारा झरना, सोन घड़ियाल अभयारण्य और लुभावने झरने। ये स्थल प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव उत्साहीकों के लिए एक आदर्श स्थान है। डिंडोरी में भी नर्मदा घाट, देवनाला झरना और घुघवा राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।

बीजापुरी और उमर गोहाना जैसे गांव पर्यटकों के लिए आराम और साफ वातावरण का एक अच्छा उदाहरण हैं। यहां विदेशी पर्यटकों को भी अपना घर जैसा महसूस होता है। स्थानीय लोगों के सहयोग से यहां के ग्रामीण अनुभव को और भी बेहतर बनाया जा रहा है ।


अनूपपुर और डिंडोरी में पर्यटन को बढ़ावा देने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होगा, बल्कि यहां की संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी होगा।

क्या आप अनूपपुर और डिंडोरी के बारे में और जानना चाहते हैं? या फिर आप यहां घूमने की योजना बना रहे हैं?

तो इन चीजों पर जरूर अपना ध्यान आकर्षित करे

कर्मा नाच का इतिहास

कर्मा नाच छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों में एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जो उनकी संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। इस नृत्य का आयोजन विशेष रूप से कर्मा वृक्ष के सम्मान में किया जाता है, जिसे उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

कर्मा नाच के पीछे की कहानी

कर्मा नाच की उत्पत्ति के बारे में कई कथाएं हैं। एक कथा के अनुसार, राजा कर्मसेन की कहानी से इसकी शुरुआत हुई, जो अपने राज्य को खोने के बाद जंगल में देवता की पूजा करने लगे। देवता की कृपा से उन्हें उनका राज्य वापस मिला, और तब से यह नृत्य प्रतिवर्ष क्वार के महीने में आदिवासी क्षेत्रों में मनाया जाता है।

कर्मा नाच की विशेषताएं

- यह नृत्य पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां पंक्तिबद्ध होकर करते हैं।
- इसमें माँदर और टिमकी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर लोग थिरकते हैं।
- यह नृत्य आमतौर पर रात्रि के समय होता है और इसमें कोई विशेष रूपसज्जा की आवश्यकता नहीं होती है।

कर्मा नाच के प्रकार

छत्तीसगढ़ में करमा नृत्य की विभिन्न शैलियां प्रचलित हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं

- माड़ी करमा: बस्तर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में दण्डामी माड़िया जनजाति द्वारा किया जाने वाला नृत्य।
- करमा नृत्य: छत्तीसगढ़ के बिलासुपर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगाँव, रायगढ़, सरगुजा, जशपुर तथा कोरिया, कवर्धा जैसे जिलों में निवास करने वाली जनजातियों द्वारा किया जाने वाला नृत्य।
कर्मा नाच केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समुदाय की आस्था, संस्कृति और इतिहास का प्रतीक है। यह नृत्य प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका भी है ।

Ashish Joshi

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ASHISH JOSHI | आई विटनेस न्यूज़ 24 के संचालक के रूप में, मेरी प्रतिबद्धता हमारे दर्शकों को सटीक, प्रभावशाली और समय पर समाचार प्रदान करने की है। मैं पत्रकारिता की गरिमा को बनाए रखते हुए हर खबर को सच के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूँ। आई विटनेस न्यूज़ 24 में, हमारा लक्ष्य है कि हम समाज को सशक्त और जोड़ने वाली आवाज़ बनें।