आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 11 फरवरी,सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन हेलमेट न लगाने पर पेट्रोल पंपों से तेल न देने, सीटबेल्ट चेकिंग और दोपहिया-चारपहिया वाहनों के प्रदूषण की कड़ी जांच जैसे नियम लागू कर रहा है। लेकिन इन्हीं सड़कों पर रोजाना दौड़ रहे ओवरलोड टैक्सी, ऑटो पर कार्रवाई उतनी सख्त क्यूँ नहीं। यही वजह है कि आमजन के बीच परिवहन विभाग के “दोहरे मापदंड” पर सवाल तेज़ हो गए हैं।परिवहन विभाग के अनुसार प्रदेश में पिछले दो वर्षों से न नए परमिट जारी हुए, न पुराने परमिट का नवीनीकरण। इसके बावजूद बड़ी संख्या में टैक्सी, और ऑटो रोजाना जिला मुख्यालय से कस्बों में फर्राटे भर रहे हैं। न इनके पास वैध परमिट है, कइयों के पास तो फिटनेस, और प्रदूषण प्रमाणपत्र भी नही है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुख्य मार्गों पर चेकिंग होती है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से ओवरलोड वाहन वहां नज़र नहीं आते, या फिर उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है।
लोगों का कहना है कि हेलमेट, सीटबेल्ट और PUC को लेकर पुलिस और परिवहन विभाग बेहद सक्रिय हैं।लेकिन यही सख्ती ऑटो और टैक्सी पर क्यों नहीं?न तो सीटबेल्ट जांच होती है,न फिटनेस देखा जाता है,न प्रदूषण प्रमाणपत्र,और न ही इनकी ओवरलोडिंग पर रोक।
ओवरलोडिंग—खतरा भी, बीमा भी रद्द,मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 113 से 194 तक ओवरलोडिंग के लिए भारी जुर्माना और वाहन बंद करने का प्रावधान है।
फिर भी सड़कों पर 20–25 सवारियाँ ठूस कर नियमों की खुली धज्जियाँ उड़ाती रोजाना ये दौड़ती नज़र आ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरलोड वाहन दुर्घटनाओं का बड़ा कारण हैं, और हादसा होने की स्थिति में बीमा कंपनियाँ क्लेम भी नकार देती हैं।
हेलमेट अनिवार्यता और पेट्रोल रोक नीति के बाद दुर्घटना मृत्यु दर में करीब 40% तक कमी दर्ज की गई।
सड़क सुरक्षा कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इसी तर्ज पर ओवरलोड वाहनों पर ‘नो फ्यूल–नो रोड’ नीति लागू की जाए। यानी:बिना फिटनेस,बिना परमिट,बिना प्रदूषण,ओवरलोडवाहनों को न पेट्रोल मिले और न सड़क पर चलने दिया जाए।क्या चेकिंग केवल निजी वाहनों के लिए है?ओवरलोड वाहनों को कार्रवाई से छूट है,दो वर्षों से परमिट नवीनीकरण बंद है तो बिना परमिट वाहन कैसे चल रहे हैं?
सड़क सुरक्षा सिर्फ हेलमेट और सीटबेल्ट तक सीमित क्यों?
प्रदेश में सड़क सुरक्षा नियमों की एकरूपता और पारदर्शिता पर जन विश्वास कमजोर पड़ रहा है। नागरिकों की मांग है कि हेलमेट और सीटबेल्ट की तरह ही ओवरलोड वाहनों पर भी समान सख़्ती लागू की जाए, ताकि सड़कें सुरक्षित हों और नियम सभी पर एक समान लागू नज़र आएँ।

