यूरिया–डीएपी की अवैध बिक्री पर छापा, लेकिन वही विक्रेता फिर धड़ल्ले से बेच रहा खाद
आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 18 फरवरी, आदिवासी बाहुल्य जिले में नियम कायदों की धज्जियाँ उड़ाना अवैध कार्य करने वालों का मानो शगल बन गया है! और ऐसा होना भी इसलिए लाजमी है! क्योंकि जिनके हाथों में इन पर नकेल कसने की जिम्मेदारी है वही इन्हें संरक्षण प्रदान किये हुए हैं! किसान लुटता है तो लुटता रहे इन्हें इससे जरा भी कोई सरोकार नहीं है! जिसका उदाहरण है विक्रमपुर में संचालित दुबे बीज भंडार की दुकान जहां बीज की आड़ में बिना लाइसेंस यूरिया एवं डी, ए, पी, खाद किसानों को शासकीय मूल्य से अधिक दामों में बेचीं जा रही है! जिसकी खबर बीते दिनों प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास की टीम ने बीते 31 जनवरी को छापेमार कार्यवाई की थी कार्यवाई के संबंध में विभाग के जिम्मेदारों से जानकारी मांगने पर अब तक गोलमोल जवाब ही दे रहे हैं! यूरिया और डीएपी खाद की अवैध बिक्री पर कृषि विभाग द्वारा हाल ही में छापामार कार्रवाई की गई थी। जो अब महज दिखावा साबित हो रही है विभाग ने सख्ती का दावा करते हुए लाइसेंस जांच, स्टॉक मिलान और नमूने लेने की प्रक्रिया पूरी की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद वही विक्रेता खुलेआम यूरिया–डीएपी की बिक्री करता नजर आ रहा है।
किसानों का आरोप है कि छापे की सूचना पहले ही लीक कर दी जाती है, जिससे औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है और बिना बिल के खाद बेची जा रही है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि विभाग ने सख्त कार्रवाई की होती तो संबंधित दुकान सील होती या लाइसेंस निलंबित किया जाता। लेकिन वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि या तो कार्रवाई अधूरी थी या फिर प्रभावहीन।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब छापे के बाद भी अवैध बिक्री जारी है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या विभाग केवल दिखावटी कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है? किसानों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि खाद की कालाबाजारी पर वास्तव में रोक लग सके।




