बगैर रॉयल्टी के रेत से भरे डंपर बेखौफ दौड़ रहे सड़कों पर
आई विटनेस न्यूज 24, गुरुवार 16 मई
डिंडोरी आदिवासी बाहुल्य जिले में प्रशासनिक तंत्र सहित जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली हमेशा से ही सुस्त एवं लचर रही है या फिर अवैध कार्य करने वालों को संजीवनी देने का काम ये मोन रहकर करते है शायद यही वजह है की अवैध कार्य करने वालों के हौसले परवान चढ़े हुए है गौरतलब है कि जिले में गौड़ खनिज प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिसके उत्खनन के लिए शासन द्वारा तय मापदंडों के अनुरुप दोहन होना चाहिए परंतु इस आदिवासी जिले में चाहे रेत ठेकेदार हो या स्टोन क्रेशर चलाने वाले या फिर सड़क निर्माण कार्य करने वाला ठेकेदार हो ये सभी सारे नियमों की बखिया उधेड़ते हुए अपने अवैध कार्यों को अंजाम देते हैं और संबंधित विभाग इन्हें मोन स्वीकृति ऐसा ही मामला है विकासखंड समनापुर अंतर्गत आने वाली रेत खदान दिवारी एवं कमको मोहनिया का जहां तथाकथित ठेकेदार अपनी दबंगई की दम पर बेखौफ जे सी बी मशीन लगाकर नदी से रेत निकालने के लिए नदी का सीना छलनी कर रहा है वहीं खनिज विभाग का अमला ठेकेदार के आगे बेदम बैठा हुआ है, भानपुर के रेत कारोबारी पवन अहिरवार के द्वारा बताया गया की रेत ठेकेदार के द्वारा रॉयल्टी नहीं काटी जाती है, बल्कि गेट पास की पर्ची में ही ₹11000 की धनराशि चढ़ा कर दी जाती है, जबकि 13000 रुपए की रॉयल्टी नियम अनुसार कटी जानी चाहिए, जो नहीं काटी जाती है! जिससे शासन को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, रेत करोबारियों द्वारा रॉयल्टी की मांग की जाने पर ठेकेदार के गुर्गों के द्वारा यह बात कही जाती है, कि तुम्हारी गाड़ियां कहीं भी नहीं पकड़ी जाएगी क्योंकि हमारी सभी जगह सेटिंग बनी हुई है, गौरतलब है कि बगैर रॉयल्टी के दिन में लाखों रुपए का व्यापार रेत ठेकेदार के द्वारा किया जा रहा है, और शासन प्रशासन को लाखों रुपए का राजस्व का नुकसान हो रहा है!
इनका कहना है
रेत ठेकेदार के द्वारा रॉयल्टी नहीं दी जा रही है, केवल 11000 रुपए की गेट पास पर्ची दी जाती है,
स्थानीय व्यक्ति पवन अहिरवार
इनका कहना है
आप लोगों के माध्यम से मुझे जानकारी हुई है, कि ठेकेदार के द्वारा रॉयल्टी नहीं दी जा रही है, मैं कल ही जाकर कार्यवाही करता हूं!
शशांक शुक्ला
जिला खनिज अधिकारी

