क्या बच्चों के भविष्य की कोई अहमियत नहीं ?
मामला क़स्बा शाहपुर का
राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 20 अगस्त,आदिवासी बाहुल्य जिले में शिक्षा व्यवस्था के हालत न किसी "आम" से छुपे हैं न किसी "खास" से मगर फिर भी हालत हैं की सुधरते नहीं देश का आने वाला भविष्य कहीं जर्ज़र भवन तो कहीं टपकती छत तो कहीं तिरपाल के नीचे बैठकर अपना भविष्य गढ़ने विवस है!पर शिक्षा जैसे अहम विषय को लेकर मर चुकी संवेदनाये कब तक जागेंगी ज्वालांत सवाल है प्रशानिक तंत्र से और सरकार में बैठे जिम्मेदारों से क्या करोड़ों की लागत से बने चमचामाते स्कूल भवन तालों में जकड़े रहने के लिए है क्योंकि इन्हें बने एक साल से अधिक समय हो गया है बावजूद इसके छात्र छात्राओं को अव्यवस्थाओं के बीच अपने सुनहरे कल का भविष्य गढ़ने मजबूर होना पड़ रहा है ये तस्वीरें आईना दिखाती है उन तमाम सरकारी दावों को जहाँ इनकी फाइलों में जिले की शिक्षा व्यवस्था चमकती दमकती दिखती है पर हालत इससे इतर तमाम किताबी दावों को मुँह चिढ़ाती दिखती हैं!जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर क़स्बा शाहपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की ही तस्वीर साफ कर देते हैं कि कैसे अव्यवस्थाओं के बीच छात्र छात्राएं अध्यापन कार्य करने को विवश हैं पर शिक्षा विभाग सहित जनप्रतिनधियों को इससे जरा भी सरोकार नहीं! गौरतलब है कि क़स्बा शाहपुर में हाई स्कूल के खस्ता हाल भवन में कक्षा 9 से 12 वीं तक की कक्षाओं में लगभग 750 छात्र छात्राओं को परेशानियों का सामना करते हुये बड़ी जद्दोजहद के बीच पढ़ाई करना पड़ रहा है पर्याप्त कमरे न होने के कारण स्कूल के बरामदे में कक्षाएँ संचालित हो रही है जहाँ पास ही बने टॉयलेट की बदबू बच्चों को खासा परेशान करती है पर पढ़ लिखकर कुछ बनने का जूनून इन बच्चों को परेशानियों से लड़ना रोजाना सिखा जाता है ऐसा नहीं स्कूल में छात्र छात्राएं ही परेशान हैं यहां पदस्थ शिक्षक भी परेशानियों के बीच अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाहन पूर्ण ईमानदारी से करते हुए बच्चों को पढ़ा रहे हैं कहने को तो करोड़ों की बिल्डिंग बीते डेढ़ साल से बनकर तैयार है!पर लोकार्पण की सिगुफे बाजी ने अब तक देश के आने वाले भविष्य पर खलल डाल रखा है!नहीं तो यूँ असुविधाओं के बीच बच्चों को अपना भविष्य गढ़ने विवश नहीं होना पड़ता सूत्रों की माने तो जिला कलेक्टर के द्वारा समीक्षा बैठक में सहायक आयुक्त एवं जिला शिक्षा अधिकारी को बनकर तैयार हो चुके नवीन शाला भवनों का लोकार्पण कराकर स्कूल संचालित करने के निर्देश दिये थे लेकिन एक पखवाड़े से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी निर्देश पर अमल नहीं हो सका है!यहां विचारणीय प्रश्न यह है की शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत के लिये सिस्टम संजीदा क्यों नहीं ,?