आई विटनेस न्यूज 24, मंगलवार 18 नवंबर,जिले के समनापुर ब्लॉक की दिवारा रेत खदान में इन दिनों नियमों के विरुद्ध धड़ल्ले से मशीनों से रेत उत्खनन किया जा रहा है। शासन ने जिले में रेत की कमी न हो और अवैध उत्खनन पर रोक लगाने के उद्देश्य से रेत खदानों की स्वीकृति दी थी, परंतु एनजीटी के दिशा-निर्देशों का पालन यहां पूरी तरह शिथिल दिखाई दे रहा है।
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की नोटिफिकेशन के अनुसार मानव श्रम से ही रेत खनन की अनुमति है। मशीनों से उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा ‘चैन माउंटेन मशीन’ से रात के समय बुढ़नेर नदी में रेत निकासी की जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि रातभर मशीनें चलती हैं और डंपर रेत भरकर बाहर ले जाते हैं, जबकि दिन में मुश्किल से एक-दो डंपर ही आते हैं। दिवारा गांव के करीब 150 से 200 मजदूर रेत खदान में काम करते हैं, लेकिन मशीनों के प्रयोग के कारण उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है। मजदूरों को अब मुश्किल से 100 से 200 रुपये प्रतिदिन मिल रहे हैं, जिससे उनका रोज़मर्रा का खर्च चलाना कठिन होता जा रहा है।केंद्र और राज्य सरकार जहाँ “प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम” व “मुख्यमंत्री ग्रामीण रोजगार योजना” जैसी योजनाओं से बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही हैं, वहीं खनन क्षेत्र में मशीनों के अंधाधुंध प्रयोग से स्थानीय लोगों का रोजगार छिन रहा है।
हालांकि मीडिया टीम के दिवारा खदान में पहुचने की जानकारी के बाद खनिज विभाग और प्रशासन हरकत में आया। प्राप्त जानकारी के अनुसार खनिज अधिकारी उसी क्षेत्र में जाने की जानकारी मिली, अब देखना ये है कि दिवारा रेत खदान में रात के समय हो रहे मशीनों से खनन पर तत्काल रोक और एनजीटी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाता है या नही? ताकि क्षेत्र की मजदूर जनता को उनका हक मिल सके।



