आई विटनेस न्यूज 24, रविवार 14 दिसम्बर,15 अगस्त 1947 को देश की आज़ादी के उपलक्ष्य में देशभर के नगरों और कस्बों में प्रतीकात्मक रूप से बनाए गए जय स्तंभ आज भी स्वतंत्र भारत की भावना और बलिदान की याद दिलाते हैं। परंतु डिण्डोरी जिला मुख्यालय का यह ऐतिहासिक जय स्तंभ आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।
शहर के हृदय स्थल — पुराने कॉलेज परिसर में नगर परिषद द्वारा तैयार किए जा रहे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण कार्य में यह आज़ादी का प्रतीक स्तंभ दबने की कगार पर है। प्रशासन, नगर परिषद और जनप्रतिनिधि इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की दिशा में उदासीन दिखाई दे रहे हैं।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह जय स्तंभ केवल एक स्थापत्य नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों की यादों का प्रतीक है। “जिस प्रतीक ने हमें हमारे गौरवशाली इतिहास से जोड़े रखा, आज वही विकास की बलि चढ़ने जा रहा है,” पत्रकार वार्ता के दौरान जब इस विषय पर प्रभारी मंत्री प्रतिभा बागड़ी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “इस विषय को देखा जाएगा।” अब देखना यह होगा कि वे इस आज़ादी और बलिदान के प्रतीक ‘जय स्तंभ’ को बचाने के लिए कितनी गंभीरता दिखाती हैं।आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर जहाँ पूरे देश में “आज़ादी का अमृत महोत्सव” मनाया गया, वहीं डिण्डोरी का यह जय स्तंभ अनदेखा और उपेक्षित खड़ा है। यह स्थिति प्रश्न उठाती है — क्या हम अपने स्वतंत्रता के प्रतीकों को बचाने में असफल हो रहे हैं?


