आई विटनेस न्यूज 24, शनिवार 17 जनवरी,शहपुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मरवारी में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। यहां शिक्षक की पत्नी अर्पणा झारिया, जिनके अंक मात्र 66.5 हैं, को आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका पद पर नियुक्त कर दिया गया, जबकि इसी भर्ती प्रक्रिया में 68 अंक प्राप्त करने वाली रितु बर्मन और 67.5 अंक वाली मेघा झारिया जैसी गरीब व लाचार परिवारों की बेटियां चयन से वंचित रह गईं और आज मजबूरी में घरों में काम करने को विवश हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षक के परिवार के पास बीपीएल कार्ड होना बताया जा रहा है। नियमों के अनुसार शासकीय कर्मचारी होने की स्थिति में बीपीएल कार्ड बनना ही नहीं चाहिए, इसके बावजूद कथित तौर पर संबंधित परिवार बीपीएल कार्ड के जरिए राशन की दोनों योजनाओं का लाभ उठा रहा है। वहीं, वास्तविक रूप से गरीब परिवारों की बेटियां न्याय के लिए भटकने को मजबूर हैं।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अंकों और पात्रता के आधार पर निष्पक्ष चयन होता, तो अधिक अंक पाने वाली गरीब बेटियों को रोजगार मिलता। अब सवाल यह है कि आखिर कब सुधरेगा यह सिस्टम और कब रुकेगा गरीबों के हक पर डाका डालने वाला भ्रष्टाचार।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में पात्र और जरूरतमंदों को उनका हक मिल सके।

