कार्यपालिका के कार्य में विधायका का क्या काम?
राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, रविवार 1 फरवरी, कस्बा शाहपुर में बीते बुधवार को क्षेत्रीय विधायक, तहसीलदार और शाहपुर पुलिस की मौजूदगी में असंवैधानिक तौर पर चली अतिक्रमण हटाने की कार्यवाई आमजन के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है! सूत्रों से प्राप्त जानकारी मुताबिक जानकारों का अपना मानना है! कि अवैध अतिक्रमण पर कार्यवाई करने का कार्य कार्यपालिका का होता है!लेकिन वह भी न्यायसंगत होना चाहिए पर उक्त कार्यवाई में विधायका की मौजूदगी और महिला से विवाद कतई न्यायसंगत नहीं माना जा सकता दरअसल पूरे मामले का फलसफा यह है कि खसरा क्रमांक 461/2 भूमि में सत्यप्रकाश शुक्ला एवं उनके चार भाइयों का अधिपत्य है जिसमें फेंसिंग लगी हुई थी जिस पर बिना किसी पूर्व सूचना तथा नोटिस दिये क्षेत्रीय विधायक की मौजूदगी में तहसीलदार के द्वारा 28 जनवरी 2026 बुलडोजर चलाकर बल पूर्वक फेंसिंग हटा दी गई इस पूरी करवाई के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराते हुए पीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत जिला कलेक्टर सहित पुलिस अधीक्षक से करते हुए न्याय की गुहार लगाई है!उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले में तहसीलदार की भूमिका संदेहास्पद बनी हुई है!सूत्रों से प्राप्त जानकारी मुताबिक कस्बा में मुख्य मार्ग पर फैले अवैध अतिक्रमण को हटाने तहसीलदार के द्वारा दिनांक 26 /07/2024 को बेदखली की नोटिस जारी की गई थी जिसमें खसरा नं 372 रकवा 4.64 में अवैधानिक अतिक्रमण किये जाने का दोशी पाए जाने के फलस्वरूप न्यायलय द्वारा दण्डित करते हुए प्रश्नअधीन शासकीय भूमि खसरा नं 372 रकवा 4.64 के अंश भाग से बेदखल करने का आदेश पारित किया गया था! और बेदखली नोटिस हस्ताक्षर एवं पदमुद्रा के साथ जारी किया गया था! इसके बाद 14/11/2025 को एक नोटिस अतिक्रमण करने वालों को तहसीलदार द्वारा जारी किया गया और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाई करने के लिए अवैध कब्ज़ा हटाये जाते समय के लिए आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए दिनांक 03/06/2025 को पत्र जारी किया लेकिन अवैध अतिक्रमण पर अब कार्यवाई पूरी तरह से शून्य है! सूत्रों की माने तो बीते दिनों जो बुलडोजर कार्यवाई शुक्ला परिवार की भूमि पर हुई उसकी सूचना ग्राम पंचायत को भी नहीं थी वहीं जहां एक ओर तहसीलदार वायरल वीडियो में भूमि नापने की बात पीड़ित परिवार की महिला से कर रहे हैं! तो वहीं दूसरी ओर बुलडोजर भी तहसीलदार के सामने चल रहा है!यहां पर अहम सवाल यह है कि आनन फानन में क्षेत्रीय विधायक की मौजूदगी में तहसीलदार को पुलिस बल का उपयोग कर आखिर किन नियमों के तहत की गई और जो नोटिस इनके न्यायलय से जारी हुई उस पर अब तक क्या कार्यवाई हुई इसका जवाब भी लाजमी है!
क्या कहते हैं नियम
विधायक को स्वयं (व्यक्तिगत रूप से) अतिक्रमण हटाने का कानूनी अधिकार नहीं है। अतिक्रमण हटाने की शक्ति केवल सक्षम राजस्व या प्रशासनिक अधिकारियों (जैसे तहसीलदार, एसडीएम, नगर निगम आयुक्त) के पास ही होती है, जो कानूनन नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया अपनाते हैं।
सलाहकार भूमिका: विधायक स्थानीय प्रशासन को अतिक्रमण के बारे में सूचित कर सकते हैं और हटाने के लिए दबाव डाल सकते हैं, लेकिन सीधे कार्रवाई नहीं कर सकते।
कानूनी प्रक्रिया: अतिक्रमण हटाने के लिए सबसे पहले सीमांकन (नक्शा-खसरा की जांच) होता है।
नोटिस और सुनवाई: शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा पाए जाने पर, अतिक्रमणकर्ता को कारण बताओ नोटिस दिया जाता है और उसका पक्ष सुना जाता है।
आधिकारिक आदेश: एक उचित प्रक्रिया के बाद ही, विधिवत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आदेश के बाद प्रशासन की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया जाता है। अतिक्रमण हटाने का काम नियमों से चलता है, न कि किसी के व्यक्तिगत आदेश से।


