आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 6 फरवरी,आदिवासी बाहुल्य जिले नियमों के ताक पर रख बिना वैध लाइसेंस के यूरिया और डीएपी खाद बेचने का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। कृषि विभाग के स्पष्ट नियमों के बावजूद कई दुकानदार और अस्थायी विक्रेता बिना पंजीकरण व अनुमति के खाद की बिक्री कर रहे हैं, जिससे किसानों के साथ धोखाधड़ी और सरकारी व्यवस्था को सीधी चुनौती दी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ स्थानों पर किराना दुकानों, गोदामों और अस्थायी ठिकानों से यूरिया-डीएपी खाद मनमाने दामों पर बेची जा रही है। इन विक्रेताओं के पास न तो लाइसेंस है और न ही स्टॉक व बिक्री का कोई रिकॉर्ड, जिससे कालाबाजारी और मिलावट की आशंका भी बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें ऐसे अवैध विक्रेताओं से खाद खरीदनी पड़ रही है, लेकिन न रसीद मिलती है और न ही गुणवत्ता की कोई गारंटी। यह स्थिति किसानों के हितों के साथ-साथ कृषि कानूनों का खुला उल्लंघन है।
स्थानीय लोगों और किसान संगठनों ने मांग की है कि बिना लाइसेंस खाद बेचने वालों के खिलाफ तत्काल छापेमारी, माल जब्ती और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी अवैध बिक्री उनकी नजरों से कैसे बची रही।
इनका कहना
जिला डिण्डौरी में यूरिया एवं डीएपी खाद की खुलेआम कालाबाज़ारी की जा रही है। संबंधित विक्रेताओं द्वारा निर्धारित सरकारी दरों से अधिक मूल्य वसूला जा रहा है तथा कई स्थानों पर खाद को गुप्त रूप से अधिक दामों पर बेचा जा रहा है।
इससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और समय पर खाद उपलब्ध न होने के कारण फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह स्थिति शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।
उक्त मामले की शीघ्र जाँच कर दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
बिहारी लाल साहू
किसान नेता


