राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, शनिवार 11 अप्रैल,जिले में डॉ. अंबेडकर जयंती सप्ताह के तहत शिक्षा और संस्कार का अनूठा संगम देखने को मिला। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर सहित जिले के सभी विद्यालयों में आयोजित चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताओं ने माहौल को पूरी तरह प्रेरणादायक बना दिया।
विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता के जरिए डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर के जीवन संघर्ष, उनके विचार, संविधान निर्माण में उनकी भूमिका और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को रंगों में सजीव कर दिया। कहीं संविधान की प्रस्तावना उकेरी गई, तो कहीं “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” का संदेश चित्रों में झलकता नजर आया।
हर चित्र में दिखी सोच, हर रंग में दिखा संदेश
प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों की कलाकृतियां सिर्फ कला नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आईना बनकर सामने आईं। रंगोलियों में समानता, भाईचारे और न्याय का संदेश आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया।
शिक्षा के साथ संस्कार का संगम
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को संविधान के मूल्यों से जोड़ना और उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। शिक्षकों ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भविष्य के जागरूक नागरिक तैयार करने की नींव रखते हैं।
प्रशासन की पहल बनी मिसाल
जिला प्रशासन द्वारा किया गया यह आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे विद्यार्थियों में न केवल रचनात्मकता बढ़ी, बल्कि उनके भीतर सामाजिक समरसता और समानता के प्रति समझ भी मजबूत हुई।
निष्कर्ष
डिंडोरी में मनाया गया अंबेडकर जयंती सप्ताह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसा अभियान बनकर उभरा, जिसने नई पीढ़ी को संविधान, अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने की दिशा में मजबूत संदेश दिया।
साफ है—जब शिक्षा में संस्कार जुड़ते हैं, तब ही समाज में असली बदलाव की नींव रखी जाती है।

