आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 1 मई,डिंडोरी जिले में अवैध सूदखोरी का व्यापार तेज़ी से फैलता जा रहा है, जबकि इसे रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम अब तक दिखाई नहीं देता। साहूकारी एक्ट के तहत ब्याज पर लेन–देन करने के लिए पंजीयन और वैध लाइसेंस अनिवार्य है, मगर जिले में आज तक एक भी व्यक्ति ने लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया। इसके बावजूद सूद पर पैसा लगाने का धंधा संगठित रूप से चलता रहा, जिसे प्रशासन रोकने में पूरी तरह नाकाम दिख रहा है।
कुछ दिन पहले गाड़ासरई में हुई घटना ने एक बार फिर संकेत दिया कि जिले के कई गांवों और कस्बों में यह कारोबार खुलेआम चल रहा है,
अधिकांश सूदखोर अपनी मनमानी से ब्याज निर्धारित करके कर्ज देते हैं।हर महीने मोटी रकम सूद के नाम पर वसूली जाती है।समय पर ब्याज न देने पर मूलधन लगातार बढ़ा दिया जाता है।कई मामलों में कर्जदारों के जेवर, जमीन के कागजात या घर तक गिरवी रखवा लिए जाते हैं।
ऊँची ब्याज दरें इतनी अमानवीय होती हैं कि एक साल में मूलधन दोगुना हो जाता है। इससे गरीब परिवार, छोटे व्यापारी आर्थिक बर्बादी के दलदल में फँसते चले जाते हैं।
बड़ा सवाल ये है कि सट्टेबाज़ी–जुआ जैसे अवैध कामों पर पुलिस बिना शिकायत भी तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन उतने बड़े पैमाने पर चल रहे सूदखोरी के गोरखधंधे पर कोई स्वतः संज्ञान नहीं लिया जाता—जबकि यह सीधे तौर पर साहूकारी एक्ट और राजस्व कानूनों का उल्लंघन है।
सरकार ऑनलाइन जुए और ड्रीम–11 जैसे प्लेटफार्मों पर कार्रवाई कर रही है, ईडी तक जांच कर रही है, तो फिर डिंडोरी में फैले इस अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई क्यों नहीं?स्थानीय लोगों में चर्चा है कि कुछ मामलों में पुलिस के ही कुछ लोग सूदखोरों को कार्रवाई से पहले सूचना देकर बचाने की कोशिश करते हैं, जिससे यह व्यवसाय निर्भीक होकर फैलता जा रहा है।सूदखोरी करने वालों को सरकार द्वारा तय ब्याज दरों के पालन के साथ हर साल आय–व्यय का रिटर्न जमा करना होता है, लेकिन लाइसेंस न लेने के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती। नतीजतन, सरकार का करोड़ों का राजस्व हर साल डूब जाता है।आदिवासी बाहुल्य जिले में सबसे अधिक प्रभावित गरीब तबकाकठिन बैंक प्रक्रियाओं और आपात जरूरतों के कारण गरीब, और छोटे व्यापारी सूदखोरों के जाल में फँस जाते हैं।एक बार कर्ज लेने के बाद वे कई–कई सालों तक उससे मुक्त नहीं हो पाते, जिससे डिंडोरी में यह व्यापार सामाजिक और आर्थिक शोषण का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।
डिंडोरी में यह काला कारोबार गरीबों को कर्ज के ऐसे गहरे दलदल में धकेल रहा है जहाँ से निकलना लगभग असंभव हो जाता है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और क्या वास्तव में इस अवैध साम्राज्य पर लगाम लगाई जाती है, या सूदखोरी का जाल और गहराता जाएगा।

