आई विटनेस न्यूज 24, सोमवार 1 जून,जिला प्रशासन ने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं उच्चाधिकारियों की जांच रिपोर्ट के विपरीत कार्रवाई करने के मामले में वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक रामकृष्ण उद्दे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शहपुरा द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में सहकारी समिति बरगांव के ऑपरेटर द्वारा शासन के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने संबंधी तथय सामने आए थे। जांच दल में तहसीलदार शहपुरा, नायब तहसीलदार, खाद्य अधिकारी एवं राजस्व निरीक्षक शामिल थे। जांच के दौरान संबंधित भूमि पर सिकमी बटाई का नाम दर्ज नहीं पाया गया तथा समर्थन मूल्य पर फसल विक्रय संबंधी दावे भी सही नहीं पाए गए।
जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन नायब तहसीलदार शैलेष गौर को दोषमुक्त बताया गया था। इसके बावजूद वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक रामकृष्ण उद्दे द्वारा उच्चाधिकारियों की जांच रिपोर्ट के विपरीत पुलिस थाना में बयान दर्ज कराए गए, जिनके आधार पर शैलेष गौर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई।
जारी आदेश के अनुसार, रामकृष्ण उद्दे ने बयान दर्ज कराने से पूर्व न तो जिला कलेक्टर एवं न ही अपने विभागीय प्रमुख से अनुमति प्राप्त की। इस कृत्य को पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही माना गया है। प्रशासन ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के अंतर्गत कदाचार की श्रेणी में माना है।
उक्त तथयों के आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत रामकृष्ण उद्दे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला पंचायत डिण्डौरी निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

