आई विटनेस न्यूज 24, शहडोल , 29 नवम्बर 2020, 2 करोड़ 40 लाख मैं नहीं बन सके तीन खेल मैदान, पूर्णता की अवधि 1 वर्ष थी, 5 वर्ष पहले मैदानों की स्वीकृति प्रशासन द्वारा ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा विभाग को दी गई लेकिन यह खेल मैदान बनने से पहले ही अंतिम सांस गिन रहे हैं। क्योंकि अभी तक यह मैदान पूर्ण नहीं हो पाए हैं और मामला अधर में लटका हुआ है। ऐसे हो रहा है जिले में विकास जो कछुए की चाल को भी मात दे रहा है।
शहडोल जिले के दो विकासखंडों बुढार में एक तथा जयसिंहनगर मैं दो खेल मैदान स्वीकृत किए गए हैं। एक खेल मैदान भठिया में 20 मई 2015 को स्वीकृत किया गया था इस पर 79.88 लाख खर्च किए जाने थे और इस खेल मैदान को 7 अक्टूबर 2016 को पूर्ण किया जाना था लेकिन यह खेल मैदान आज तक पूर्ण नहीं हो सका इस खेल मैदान को निविदाकर रामप्रमोद तिवारी द्वारा लिया गया था लेकिन अभी तक पवेलियन का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। गौरतलब है कि जयसिंहनगर के ग्राम पंचायत वनसुकली मैं 15 जुलाई 2015 को खेल मैदान निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। इस खेल मैदान में भी लगभग 80 लाख रुपए खर्च किए जाने थे। और इस निर्माण कार्य की पूर्णता अवधि 24 मार्च 2020 थी। पर यह कार्य भी अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इस खेल मैदान के निर्माण की जिम्मेदारी रामप्रमोद द्वारा ली गई थी। सरकारी आंकड़ों की अगर माने तो इस सीरियल में भी पवेलियन का कार्य प्रगति पर है। जयसिंह नगर के खुशरवाह मैं 28 अगस्त 2017 को स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी और यह स्टेडियम भी 8000000 रुपए की लागत से बनाया जाना था लेकिन घटिया कार्यों के लिए जाना जाने वाला आदित्य एसोसिएट कोई यह कार्य 18 जनवरी 2017 को पूर्ण कर देना था। पर यह स्टेडियम भी गुणवत्ता के साथ साथ लापरवाही की भेंट चढ़ गया और पवेलियन का कार्य यहां भी अधूरा बताया जा रहा है। गौरतलब है कि 2 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से बनाए जाने वाला यह स्टेडियम आज भी अधूरा है।
जिन तीन स्टेडियम के निर्माण के लिए प्रशासन ने ढाई करोड़ रुपए खर्च करने की बात कही गई और उसकी पूर्णता 1 वर्ष की मियाद थी। उसके बावजूद स्टेडियम का निर्माण का ना होना सवाल खड़ा कर रहा है। यूं तो प्रशासन हर निर्माण कार्य पर नजर रखे हुए हैं लेकिन स्टेडियम के निर्माण कार्य पर आंखें मूंदे हुए हैं। ऐसा खेल मैदान किस काम का जो 5 साल बाद भी अपने अधूरे होने की कहानी कह रहा है। ग्रामीण यात्रिकी सेवा विभाग में कई कार्यपालन यंत्री आए और चले गए और वर्तमान कार्यपालन यंत्री तो गुणवत्ता की जीती जागती मिसाल है। पर उन्हें ना तो गुणवत्ता दिखाई दे रही है और ना ही कार्यों की पूर्णता की ओर नजर है।

