ड्राइविंग वाल्व बदलना तय किया है। यह कलपुर्जा
तोप को चारों ओर घूमने व विभिन्न कोण पर लक्ष्य
साधने की शक्ति देता है।
35 साल पुरानी तोप
वर्ष 1985-86 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी
के कार्यकाल में भारत ने स्वीडन से 400 बोफोर्स तोप
की खरीदी की थी। रक्षा मंत्रालय ने सेना को यह 29
किलोमीटर मारक क्षमता वाली तोप उपयोग के लिए
सौंप दी।
पहले भी कराई मरम्मत
सेना लगभग 35 साल से बोफोर्स तोप
(155एमएम/39 कैलिबर) का उपयोग कर रही है।
कुछ तोपों में खराबी या टूट-फूट हुई, जिन्हें
आर्मी बेस वर्कशॉप में भेजकर मरम्मत कराई जा
चुकी है।
कारगिल में दिखाया था कमाल
भारतीय सेना ने देश की सीमा कारगिल में बोफोर्स
तोप की मदद से दुश्मनों के परखच्चे उड़ाने का कमाल
दिखाया था। यह तोप आज भी भारतीय सेना के बेड़े
में रहते हुए दुश्मनों पर आग बरसाने तैयार है।
बोफोर्स तोप की मरम्मत में देशी कलपुर्जे लगाने से
सेना का खर्च कम हो सकता है। आर्मी बेस वर्कशॉप
इसी मंशा से काम कर रहा है। - अनिल शर्मा, लीडर
स्टाफ साइड, आर्मी हेडक्वार्टर, जेसीएम-3
सदस्य
अपग्रेड नहीं सिर्फ मरम्मत
आर्मी बेस वर्कशॉप में बोफोर्स तोप को अपग्रेड नहीं
बल्कि देशी कलपुर्जे लगाकर सिर्फ मरम्मत की जा
रही है। यह काम होने पर भी बोफोर्स तोप के संचालन
व मारक क्षमता में कोई बदलाव नहीं होगा। जबकि
गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने वर्ष 2011-12 में
तत्कालीन महाप्रबंधक एसपी यादव के कार्यकाल में
बोफोर्स तोप की तकनीक व कुछ हिस्सों को अपग्रेड
करके इससे और भी बेहतर 'धनुष तोप
(155एमएम/45 कैलिबर गन) बनाई है।
