करीब चार साल पहले छत्तीसगढ़ सीमा पार कर हाथियों का झुंड पहली बार पौड़ी रेंज में आया था। दो से बढ़कर इस साल हाथियों की संख्या सात तक पहुंच गई है। ये करीब पांच-छह महीने रहने के बाद चले भी जाते हैं लेकिन आते जरूर हैं। हाथियों के दल ने कुसमी क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में कई बार उत्पात मचाया है। हाथियों ने अब तक कई घरों को तोड़ा और घर में रखे अनाज को नुकसान पहुंचाया है। यही नहीं, रिजर्व क्षेत्र के कई शासकीय भवनों को गिरा दिया। पिछले वर्ष हाथियों के दल ने एक महिला को कुचलकर मार डाला था।
इसलिए यहां बनाते हैं ठिकाना
पौड़ी रेंज के जंगलों में घास के बड़े मैदान, बांस अधिक संख्या में हैं। हाथियों के रहवास के लिए ऐसे स्थान उपयुक्त होते हैं। इसी वजह से इस क्षेत्र में लगातार हाथियों की संख्या बढ़ रही है। मैदान की बड़ी घास और बांस को हाथी का मुख्य भोजन माना जाता है।
अब तक किए गए ये उपाय
रिजर्व क्षेत्र में पोड़ी रेंज के पास कुंदौर, नौढ़िया, फुलवा, गोली पहाड़ी, लुरघुटी, ददरी, आमगांव और पोड़ी जैसे गांव हैं। इन गांवों में हाथी प्रवेश न करें इसके लिए फेंसिंग, सायरन बजाकर, मशाल और मिर्ची जलाकर हाथियों के झुंड रोकने का प्रयास किया जाता रहा है। अब रिजर्व प्रबंधन नया तरीका अपना रहा है। इन गांवों में आधुनिक तरीके से मधुमक्खी पालन करवाए जाने की योजना है। इससे लगे क्षेत्र में हाथियों की संभावित आवजाही वाले क्षेत्र में पोल लगाकर, रस्सी बांधकर लकड़ी के डिब्बों में मधुमक्खी का पालन किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीणों को स्व सहायता समूह के जरिये इसी माह में प्रशिक्षण दिया जाएगा। ग्रामीण शहद निकालकर बेच भी सकेंगे।
