डिंडोरी-:आई विटनेस न्यूज24,21वीं सदी के भारत में अगर किसी मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की जगह टोकनी पर बिठा कर उसे ले जाने की मजबूरी हो तो इसे विडंबना
और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ही कहा जाएगा. दरअसल, कुछ तस्वीरें यही बोल रही हैं, जिसमें कुछ ग्रामीण मरीज को कंधे पर लादकर चारपाई पर अस्पताल ले जा
ने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं.
जिला मुख्यालय से तकिरीबन 18 किलोमीटर दूर करोपनी से लगा ग्राम चारखुटिया व संगम टोला एक वृद्धा को उसका पति और बेटा प्लास्टिक के टब की काँवड़ बना कर ईलाज के वास्ते जिला चिकित्सालय नर्मदा नदी को पर करके ले जाने को मजबूर है क्यूंकि नर्मदा नदी पर पुल नहीं है और इस गांव से यदि सड़क मार्ग से किसी मरीज को डिंडोरी उपचार हेतु लाया जावे तो लगभग 50 से 60 किमी की दूरी तय करनी होती है और यातायात के साधनों की कमी के साथ खराब सड़क भी बड़ी समस्या है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्वास्थ सेवाओं के लिये भी परेशान होना पड़ता है. अगर कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाये या फिर कोई गर्भवती महिला को प्रसव के
लिए ले जाना पड़े तो उसके लिए एम्बुलेंस गांव तक बमुश्किल पहुंच पाती है. ऐसे में उन्हें मरीज को चारपाई पर लेटाकर नदी पर कर जिला चिकित्सालय लाना पड़ता है ।
जबकि करोपनी में काले हिरण का अभ्यारण विकसित करने और इस क्षेत्र में काले हिरणों को संरक्षित करने प्रशासन द्वारा बड़े स्तर पर कार्य किए गए है ताकि पर्यटक यहां आ सके। किन्तु इस ग्राम से 2 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम चरखुटिया व संगम टोला आज भी उपेक्षित है और यहां के निवासी मूलभूत सुविधाओं को मोहताज है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि चरखुटिया से लेकर कारोपानी तक प्रधानमंत्री सड़क का निर्माण प्रस्तावित था जो आज तक नहीं हुआ, पूर्व सांसद बसोरी सिंह मसराम से ग्रामीणों ने गुहार लगाई थी तब सड़क के निर्माण की तैयारियां तो दिखाई दी थी थी और फिर यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई और आमजन आज भी इंतजार में है कि कभी भूले भटके कुछ हो जाए यहां तो हम भी सहज आवागमन से जुड़ जाए।
सवाल यह उठता है कि आखिर स्थानीय निकायों ओर जनप्रतिनिधियों को अपने ही आस पास की विकराल समस्या नजर नहीं आती या फिर भ्रष्टाचार के आगे सारी व्यवस्थाएं बोनी नजर आती है। सिर्फ लोक लुभावनी योजनाओ का झुनझुना दिखा राजनीतिक पार्टियां वोट बटोरती है और बाद मेंआंखे बंद किए मौन बैठ जाती है।
