डिंडौरी-आई विटनेस न्यूज 24,सरकार द्वारा वनों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करती है ताकि वनों की सुंदरता कायम रह सके ।
डिंडोरी जिले की पहचान सरई के पेड़ों से ही है।लेकिन विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की उदासीनता के चलते हरे - भरे जंगल ठुठ में तब्दील हो रहे हैं।
करंजिया डिंडौरी जिले के पश्चिम वन परीक्षेत्र करंजिया के वनग्राम दलदल कपोटी में मंगलवार को सरई के 30-40 फ़ीट ऊंचे हरेभरे पेड़ काटने की चौंका देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। जिले की पहचान सरई के पेड़ों से ही है। ऐसे में इतनी संख्या में वृक्षों की कटाई बेहद चिंतनीय है। वन परिक्षेत्र में तैनात ट्रेनी डीएफओ आईएफएस हरिओम शर्मा ने बताया कि इसके जिम्मेदार ग्रामीण ही हैं। वह व्यक्तिगत उपयोग के लिए पेड़ काट रहे हैं। विभाग ने जांच शुरू कर दी है। निश्चित तौरपर एक्शन लिया जाएगा।
करंजिया सहित बजाग ब्लॉक में भी जगह-जगह ठूंठ में तब्दील हुए ऊंचे-ऊंचे पेड़
डिंडौरी में करीब 40 प्रतिशत क्षेत्र हरियाली से भरा है। कभी माफिया तो कभी स्थानीय नागरिक व्यावसायिक या व्यक्तिगत उपयोग के लिए जंगल के बीचोंबीच 30-50 फ़ीट ऊंचे सरई के वृक्षों की कटाई कर रहे हैं। वन विभाग की नज़रन्दाज़गी का फायदा उठाकर अंधाधुंध पेड़ काटे जा रहे हैं। हालांकि परिक्षेत्र में हाल ही में जॉइन हुए ट्रेनी डीएफओ शर्मा ने सख्ती से करवाई कही है। उन्होंने कहा कि विभाग की टीम जांच में लगाई गई है। वन सम्पदा को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
यहाँ वन अधिनियम 1927 का पता ही नहीं
बीते कुछ समय में जिले में वनों की कटाई के कई मामले सामने आए हैं। अधिकांश मामलों में आरोपी आसानी से बच जाते हैं। ऐसे में जिले में वन अधिनियम 1927 के पालन पर बड़ा सवाल उठता है। विशेष तौरपर करंजिया और बजाग ब्लॉक में सबसे ज़्यादा मामले आए हैं। अधिकारी हर बार कड़ी कार्रवाई की बात कहते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ खास होता नहीं है। बहरहाल, पेड़ों की कटाई के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर सख्ती से एक्शन ज़रूरी है क्योंकि डिंडौरी की साल पहचान ही हैं। अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए जंगलों का सीना चीरने वालों को सबक देना भी ज़रूरी है।
विरोध करने पर मिलती है जान से मारने की धमकी
स्थानीय ग्रामीण अमर सिंह ने बताया कि करंजिया ब्लॉक के वनग्रामों में माफिया सक्रिय है। विभाग की नज़र में आए बिना माफिया के कर्मचारी आसानी से पेड़ काटकर ले जाते हैं। कई बार अधिकारियों तक जानकारी नहीं मिल पाती। ब्लॉक में काफी क्षेत्र ऐसे हैं जहां जाना आसान नहीं है। जब तक सूचना मिलती है, कर्मचारी भाग निकलते हैं। स्थानीय ग्रामीण कर्मचारियों का विरोध करते हैं तो उन्हें जान से मारने की धमकी तक दी जाती है। इसलिए भी कई बार ग्रामीण विभाग को जानकारी देने से डरते हैं।
गोपालपुर चौकी से महज कुछ ही दूर स्थित दलदल कपोटी वनग्राम के कक्ष क्रमांक 753 व 754 में वृक्षों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। यह एरिया छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है। लिहाजा बाहरी राज्य के लोगों की संलिप्पता से भी इंकार नहीं किया जा सकता। मंगलवार को सामने आए मामले में ट्रेनी डीएफओ ने पेड़ों की कटाई के लिए ग्रामीणों को ही जिम्मेदार ठहराया है। बीते दिनों वन रक्षक के निवास से वनोपज जब्ती का मामला भी सामने आया है। इसमें डिप्टी रेंजर और वनकर्मी पर भी केस दर्ज हुआ था। ट्रेनी डीएफओ ने दोषी वनकर्मियों पर भी सख्त एक्शन लेने की बात कही है।
