डॉ सुब्बाराव 13 वर्ष की आयु में ही आजादी आंदोलन से जुड़ गए थे। इसके साथ ही साथ वह महात्मा गांधी की विचारधारा से काफी प्रेरित है। जिसके बाद उन्हें गांधीवादी विचारक के रूप में जाना गया। गांधीवादी विचारक सुब्बाराव ने बुधवार को तड़के 4:00 बजे सुबह जयपुर के अस्पताल में अंतिम सांस ली है। 4:00 बजे उनके पार्थिव शरीर मुरैना पहुंचेगी। जहां उनके शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। उनका पार्थिव शरीर जोरा स्थित गांधी सेवा आश्रम ले जाया जाएगा। जहां गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
वही गांधीवादी नेता सुब्बाराव के मध्य प्रदेश से जुड़े योगदान का जिक्र करे तो उन्होंने चंबल की धरती को डकैतों से मुक्त कराया था। इसके अलावा सुब्बाराव ने 14 अप्रैल 1972 को 654 डकैतों का समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण उनकी पत्नी के साथ सामूहिक आत्मसमर्पण करवाया था। इतना ही नहीं अपने गांधीवादी विचारधारा के बलबूते उन्होंने जोरा आश्रम से 450 डकैत और राजस्थान से 100 डकैतों को गांधी की तस्वीर के सामने हथियार सहित आत्मसमर्पण करवाया था।
इसके अलावा सामाजिक कार्य में उन्होंने शिवपुर से लेकर मध्य प्रदेश के कई जिलों में गरीब और जरूरतमंद कुपोषित बच्चों के लिए काम किया था। संगम घाट पर गांधी की तेरहवीं का आयोजन शुरू करवाने का श्रेय भी सुब्बाराव को जाता है। सुब्बाराव का जन्म कर्नाटक के बेंगलुरु में 7 फरवरी 1929 को हुआ था। 13 वर्ष की आयु में आजादी आंदोलन से जुड़ने के बाद भी पुलिस की गिरफ्तारी के बाद वह आंदोलन से जुड़ गए थे। इसके साथ ही एसएन सुब्बाराव ने स्टूडेंट कांग्रेस और राष्ट्रीय सेवा दल के कार्यक्रम में भी अपनी हिस्सेदारी दी थी।
