आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 11 फरवरी,डिंडोरी जिले के सबसे बड़े डेम बिलगांव सिंचाई जलाशय में मत्स्य पालन हेतु फर्जी मछुवारों की समिति का पंजीयन किया गया है वहीं विलगांव के परंपरागत मछुवारों को उनके पुस्तैनी व्यवसाय से बेदखल करने के लिए उस फर्जी संस्था को जलाशय आबंटित करने के लिए विज्ञप्ति जारी की गयी थी। जिस पर बिलगांव के मछुवारों के द्वारा जारी विज्ञप्ति को निरस्त करने का आवेदन कलेक्टर डिंडोरी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डिंडोरी को दिया गया था, जिस पर कार्यवाही करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डिंडोरी द्वारा जांच दल गठित कर मौके पर जांच करने एवं मछुवारों की समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया गया था जिस पर मछुवारों के साथ समिति पंजीयन पर विभाग द्वारा किए गए भेदभाव का विषय शामिल था।
स्थानीय मछुआरों का आरोप है, जांच दल द्वारा मछुवारों की कोई बात न सुनते हुए अधिकारी फर्जी संस्था का पक्ष करते नजर आए वहीं सहायक संचालक मत्स्य विभाग डी के झरिया ब मत्स्य निरीक्षक एल एस सैयाम द्वारा मछली नीति 2008 से हट कर बात कही गई, इनका कहना है वंशनुगत मछुवारों को कोई प्राथमिकता नही है जिसकी समित का पंजीयन हो गया जलाशय उसे ही आवंटित कर दिए।जबकि मछली नीति 2008 मे सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर वंशानुगत मछुवारों का समिति बनाकर पट्टा देने का है।
वहीं स्थानीय मछुआरों का आरोप है कि जांच दल द्वारा किसी प्रकार की कोई जांच या कार्यवाही नहीं की गयी न ही मछुवारों की बात सुनी गई, मध्य प्रदेश शासन के बार बार दिशा निर्देश के बाद भी मछली पालन विभाग द्वारा केवल वंशानुगत मछुवारों का शोषण किया जा रहा है
