शासन का पैसा, फिर भी बदइंतजामी:
तिरपाल के पैसे कहां गए? निगवानी खरीदी केंद्र में बारिश से खराब हुआ अनाज, प्रभारी की मनमानी से उठे भ्रष्टाचार के सवाल
आई विटनेस न्यूज 24, मंगलवार 5 मई,जिला मुख्यालय में निगवानी वेयरहाउस स्थित गेहूं खरीदी केंद्र में सामने आई लापरवाही अब सिर्फ चूक नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक विफलता और संभावित भ्रष्टाचार की कहानी बनती जा रही है। लगातार बारिश के बीच हजारों क्विंटल गेहूं और मसूर खुले आसमान के नीचे पड़े रहे और तेज बारिश में पूरी तरह भीग गए। नतीजा—अनाज की गुणवत्ता बर्बाद और शासन को लाखों का नुकसान।
मौसम विभाग द्वारा पहले ही 5 तारीख तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद केंद्र में सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। मंगलवार को करीब 3 घंटे हुई तेज बारिश ने पूरी पोल खोल दी—खुले में पड़ा अनाज पानी में भीगता रहा और बाद में तिरपाल डालने की औपचारिकता निभाई गई, जो नाकाफी साबित हुई।
“लेबर नहीं मिल रही” का बहाना या सच्चाई से भागना?
केंद्र प्रभारी रघुवर का कहना है कि मजदूर (पल्लेदार) नहीं मिल रहे, इसलिए अनाज को सुरक्षित नहीं किया जा सका। लेकिन सूत्रों की मानें तो सच्चाई कुछ और ही है। आरोप है कि केंद्र प्रभारी द्वारा पल्लेदारों को कम पल्लेदारी दी जाती है, जिससे मजदूर काम करने से कतरा रहे हैं। यही वजह है कि पिछले 10 दिनों से अनाज खुले में पड़ा सड़ता रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन हर केंद्र प्रभारी को कमीशन, पल्लेदारी, तिरपाल, रस्सी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए प्रति क्विंटल भुगतान करता है, तो फिर यह लापरवाही क्यों? आखिर वह पैसा जा कहां रहा है?बारिश के पानी और नमी के कारण गेहूं और मसूर की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई जगहों पर मसूर बहकर एक जगह ढेर में तब्दील हो गई। किसानों का साफ कहना है कि यदि समय रहते लिफ्टिंग और भंडारण की व्यवस्था कर ली जाती, तो यह नुकसान टाला जा सकता था।यह पूरा मामला न सिर्फ लापरवाही, बल्कि व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदार केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह यह मामला भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
निगवानी खरीदी केंद्र की यह तस्वीर साफ बताती है कि जमीनी स्तर पर व्यवस्था किस कदर चरमरा चुकी है—और इसका खामियाजा भुगत रहे हैं किसान और सरकारी खजाना।

