डिंडोरी जिले में कई विभागों में लंबे समय से कर्मचारी मूल विभाग की पदस्थापना को छोड़कर अन्य विभागों में अटैच है। सबसे ज्यादा शिक्षा विभाग में अटैचमेंट की स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। मूल पद स्थापना स्थान से हटाकर शिक्षकों को अन्य कार्यालय में अटैच करके रखा गया है। ऐसे में शासन की अच्छी शिक्षा वाली मनसा कागजों में सिमट कर रह जाती है। बहुत से शिक्षक ऐसे स्थान पर या ऐसे कार्यालय में अटैच है जहां पर अतिरिक्त आय वेतन से अधिक होती है ऐसी स्थिति में अटैचमेंट शिक्षक भी अपने मूल पद स्थापना वाले स्थान पर नहीं जाना चाहते।
एक तरफ शासन “सब पढ़े सब बढ़ें”
“स्कूल चले हम” “बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ” जैसे स्लोगन से शिक्षा के क्षेत्र में
विकास की बात करती है वहीं जिले में शिक्षा की स्थिति कैसी है किसी से छिपी नहीं
है जिले के शासकीय विद्यालयों में कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूल भवन जर्जर हो
चुके हैं जिनमे अध्यनरत बच्चों को हमेशा खतरा बना रहता है।
वहीं दूसरी ओर शिक्षकों
की कमी के कारण स्कूलों में अतिथि शिक्षक रखे जा रहे हैं और नियमित शिक्षकों को
अन्य कार्यालयों में अटैचमेंट पर रखा गया
है व्यवस्था की दृष्टि से कुछ समय के लिए यह सही हो सकता है लेकिन लंबे समय तक
शिक्षकों को अन्य कार्यों में संलग्न रखना विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करना है।
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश के पत्र क्र./स्था.3/सी-2/196/2019/2133 भोपाल, दिनांक 22-07-24 के अनुसार सभी कलेक्टर, मुख्यकार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत ,संभागीय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण मध्यप्रदेश तथा समस्त जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है जिसमे पूर्व में जारी दो पत्रों 1 मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश दिनांक 30.05.2017, पत्र दि 20.09.2019 तथा लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र दिनांक 06.02.2016 एवं 21.06.2019 का हवाला देते हुए कहा गया है कि संदर्भित निर्देशों द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 के प्रावधान एवं उद्भूत न्यायालयीन प्रकरण में पारित निर्णयों इत्यादि का उल्लेख करते हुये शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाये जाने के निर्देश समय-समय पर प्रदान किये गये है।उपरोक्त निर्देशों के बावजूद भी प्रदेश के जिलों में शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न /आसंजित किया जा रहा है। उक्त के संबंध में निर्देशित किया जाता है कि गैर शैक्षणिक कार्य में संलग्न/आसंजित सभी शिक्षको को मूल पदस्थापना हेतु कार्यमुक्त कर शिक्षण कार्य सुनिश्चित करावें। भविष्य में शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में लगाये जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

