आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 10 अक्टूबर,डिंडोरी जिले में फर्जी अंकसूची जारी करने का मामला अब शासनिक ढिलाई और विभागीय लापरवाही का प्रतीक बन गया है।एकीकृत पलकी माध्यमिक शाला में जारी की गई कथित फर्जी अंकसूची का यह मामला पिछले कई महीनों से विभागीय फाइलों में घूम रहा है। शिकायतें एक के बाद एक पूर्व और वर्तमान दोनों सहायक आयुक्तों के पास पहुंचीं, लेकिन अब तक किसी पर भी ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।शिकायतकर्ताओं ने पहले पूर्व सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग को प्रमाणों सहित आवेदन सौंपा था।उसके बाद विभाग में पदस्थ वर्तमान सहायक आयुक्त राजेंद्र कुमार जाटव को भी वही शिकायत और दस्तावेज दोबारा दिए गए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।परंतु महीनों बीत जाने के बावजूद ना कोई जांच रिपोर्ट तैयार हुई, ना किसी आरोपी को नोटिस मिला।मामले की गंभीरता इतनी थी कि फर्जी अंकसूची स्कूल की स्थापना से पहले की तारीख में तैयार की गई थी, लेकिन विभाग ने इसे अब तक “साधारण मामला” समझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया।मामले की सच्चाई जानने जब स्थानीय पत्रकार सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय पहुँचे, तो उन्हें अंदर तक नहीं जाने दिया गया।दरबान ने सख्त लहजे में कहा — “साहब नहीं मिल सकते, पहले शिकायत की हार्ड कॉपी लेकर आइए।”पत्रकारों को दरवाज़े पर रोक देना इस बात का संकेत है कि विभाग जवाब देने से बच रहा है। सवाल उठता है कि आखिर जब मामला सार्वजनिक हो चुका है तो पारदर्शिता से डर क्यों?

