आई विटनेस न्यूज 24, सोमवार 15 दिसम्बर,जिला मुख्यालय डिंडोरी में आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए बढ़ती परेशानी का सबब बन गया है। सुबह-शाम टहलने वालों से लेकर स्कूली बच्चों और बाइक सवारों तक, आए दिन किसी न किसी पर कुत्तों के हमले की खबर सामने आ रही है। जिला अस्पताल में भी लगभग हर रोज़ डॉग बाइट के नए केस दर्ज हो रहे हैं।नगर पंचायत की ओर से कुछ माह पहले खानापूर्ति करते हुए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन न तो कुत्तों का पुनर्वास हुआ और न ही पकड़ने की कोई गंभीर कार्रवाई हुई। करीब एक साल पहले “पिंजरे लगा कर कुत्ते पकड़ने” की जो योजना बनाई गई थी, वह आज भी फाइलों में ही सीमित है।सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी देशभर में बढ़ते डॉग अटैक के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि “सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों को खिलाना तभी स्वीकार्य है जब इससे लोगों की सुरक्षा पर खतरा न हो।” साथ ही अदालत ने राज्यों और नगर प्रशासन को सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर राज्य यह सुनिश्चित करे कि सभी आवारा कुत्तों का स्टेरिलाइजेशन (बांझीकरण) और वैक्सीनेशन समय पर किया जाए।नगर निकाय कुत्तों की गणना और नियंत्रण के लिए ठोस नीति तैयार करें।आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और कुत्ते पालने या खिलाने वालों की जिम्मेदारी तय की जाए।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “कुत्तों को प्यार करने वालों” को सीधे गोद लेने का आदेश देना व्यावहारिक समाधान नहीं है — इसके स्थान पर प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त बनाना ही स्थायी रास्ता है। डिंडोरी जैसे छोटे जिलों में सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों का पालन और भी जरूरी हो जाता है, जहां नगर सीमा में डॉग बाइट के केस लगातार बढ़ रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन कोर्ट की चेतावनी पर समय रहते कदम उठाएगा या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा?
आई विटनेस न्यूज 24, सोमवार 15 दिसम्बर,जिला मुख्यालय डिंडोरी में आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए बढ़ती परेशानी का सबब बन गया है। सुबह-शाम टहलने वालों से लेकर स्कूली बच्चों और बाइक सवारों तक, आए दिन किसी न किसी पर कुत्तों के हमले की खबर सामने आ रही है। जिला अस्पताल में भी लगभग हर रोज़ डॉग बाइट के नए केस दर्ज हो रहे हैं।नगर पंचायत की ओर से कुछ माह पहले खानापूर्ति करते हुए नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन न तो कुत्तों का पुनर्वास हुआ और न ही पकड़ने की कोई गंभीर कार्रवाई हुई। करीब एक साल पहले “पिंजरे लगा कर कुत्ते पकड़ने” की जो योजना बनाई गई थी, वह आज भी फाइलों में ही सीमित है।सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी देशभर में बढ़ते डॉग अटैक के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि “सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों को खिलाना तभी स्वीकार्य है जब इससे लोगों की सुरक्षा पर खतरा न हो।” साथ ही अदालत ने राज्यों और नगर प्रशासन को सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर राज्य यह सुनिश्चित करे कि सभी आवारा कुत्तों का स्टेरिलाइजेशन (बांझीकरण) और वैक्सीनेशन समय पर किया जाए।नगर निकाय कुत्तों की गणना और नियंत्रण के लिए ठोस नीति तैयार करें।आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और कुत्ते पालने या खिलाने वालों की जिम्मेदारी तय की जाए।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “कुत्तों को प्यार करने वालों” को सीधे गोद लेने का आदेश देना व्यावहारिक समाधान नहीं है — इसके स्थान पर प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त बनाना ही स्थायी रास्ता है। डिंडोरी जैसे छोटे जिलों में सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों का पालन और भी जरूरी हो जाता है, जहां नगर सीमा में डॉग बाइट के केस लगातार बढ़ रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन कोर्ट की चेतावनी पर समय रहते कदम उठाएगा या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा?

