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रेल परियोजनाओं पर सियासी शोर, जमीनी सच्चाई ‘शून्य’ — डिंडोरी की अनदेखी और मंत्री के बयान पर बढ़े सवाल


 आई विटनेस न्यूज 24, सोमवार 6 अप्रैल,मध्य भारत के आदिवासी अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित रेल परियोजनाएं एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वर्षों से घोषणाओं, ज्ञापनों और मांगों के बावजूद ये योजनाएं फाइलों से बाहर निकल नहीं पा रही हैं। इस बीच रेल मंत्री के बयान और डिंडोरी के जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता ने पूरे मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

8 साल से फाइलों में कैद ब्योहारी–शहडोल–डिंडोरी रेल लाइन वर्ष 2017 में प्रस्तावित रीवा (ब्योहारी)–जयसिंहनगर रेल लाइन आज भी शुरू नहीं हो सकी है। इस परियोजना को आगे बढ़ाकर शहडोल, डिंडोरी, मंडला होते हुए नैनपुर तक जोड़ने की मांग लगातार उठ रही है।शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।अगर यह रेल लाइन बनती है, तो सिंगरौली से दक्षिण भारत की दूरी लगभग 78 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे माल परिवहन और यात्री सुविधा दोनों में बड़ा बदलाव आएगा।

राज्यसभा में भी गूंजी आवाज

राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम ने पेंड्रारोड–अमरकंटक–डिंडोरी–मंडला–गोटेगांव रेल लाइन की मांग जोरदार तरीके से उठाई। यह परियोजना मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों के लिए विकास का बड़ा माध्यम बन सकती है।इस पूरे मुद्दे के बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का एक बयान भी चर्चा में है। मंत्री ने कहा था कि                  “यह गरीबों की ट्रेन है”,

लेकिन जमीनी स्तर पर न तो नई रेल लाइन को स्वीकृति मिली और न ही मौजूदा कनेक्टिविटी में कोई बड़ा सुधार देखने को मिला।अगर यह “गरीबों की ट्रेन” है, तो फिर गरीब और आदिवासी अंचल अब भी रेल सुविधा से क्यों वंचित हैं?


जहां एक ओर शहडोल और छत्तीसगढ़ के जनप्रतिनिधि लगातार इस मुद्दे को संसद और मंत्रालय तक पहुंचा रहे हैं, वहीं डिंडोरी जिले के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि—इस मुद्दे को मजबूती से नहीं उठाया गया,केंद्र और राज्य स्तर पर प्रभावी दबाव नहीं बनाया गया और न ही जनता को ठोस दिशा या आश्वासन दिया गया लोगों का मानना है कि अगर डिंडोरी के प्रतिनिधि सक्रिय होते, तो इस परियोजना को आगे बढ़ में और बल मिल सकता था।शहडोल, डिंडोरी और मंडला जैसे जिले आज भी रेल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। जबकि ये क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

सवाल वही, जवाब अब भी अधूरा

रेलवे बोर्ड से लेकर मंत्रालय तक कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन परिणाम अब भी शून्य है।क्या डिंडोरी और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों को कभी रेल की सौगात मिलेगी, या फिर “गरीबों की ट्रेन” सिर्फ एक बयान बनकर रह जाएगी?


Ashish Joshi

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ASHISH JOSHI | आई विटनेस न्यूज़ 24 के संचालक के रूप में, मेरी प्रतिबद्धता हमारे दर्शकों को सटीक, प्रभावशाली और समय पर समाचार प्रदान करने की है। मैं पत्रकारिता की गरिमा को बनाए रखते हुए हर खबर को सच के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूँ। आई विटनेस न्यूज़ 24 में, हमारा लक्ष्य है कि हम समाज को सशक्त और जोड़ने वाली आवाज़ बनें।