राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, रविवार 5 अप्रैल, जिला प्रशासन के दावे और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण मालपुर संगम घाट बन चुका है। मां नर्मदा और कनई नदी का पावन संगम आज अव्यवस्था, लापरवाही और सरकारी उदासीनता का शिकार होकर दम तोड़ रहा है।
हर साल मकर संक्रांति मेला में हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहने वाला यह घाट अब मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है। मुख्य घाट सूखता जा रहा है, पानी का स्तर लगातार गिर रहा है और छोटे पुल के गेट तक गायब हो चुके हैं। हालात इतने बदतर हैं कि श्रद्धालु अब आस्था की डुबकी तो दूर, लोटे से जल अर्पित करने तक की स्थिति में नहीं हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले साल प्रभारी मंत्री और डिंडोरी कलेक्टर ने खुद मौके पर पहुंचकर बड़े-बड़े वादे किए थे। गेट लगाने, घाट की सफाई और जल संवर्धन के कार्य जल्द शुरू करने के आश्वासन दिए गए, लेकिन ये सारे वादे अब खोखले साबित हो चुके हैं।
इस वर्ष भी जिले में जल संवर्धन कार्यक्रमों की औपचारिकता निभाई जा रही है, लेकिन मालपुर संगम पूरी तरह उपेक्षित है। कलेक्टर द्वारा दो बार यहां कार्यक्रम आयोजित करने का आश्वासन दिया गया, मगर वह भी सिर्फ कागजी घोषणा बनकर रह गया।
सवाल यह है कि क्या प्रशासन की नजर सिर्फ शहर तक सीमित है? क्या ग्रामीण अंचल के धार्मिक स्थलों की कोई अहमियत नहीं बची?
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही घाट का जीर्णोद्धार नहीं हुआ, तो यह ऐतिहासिक संगम स्थल पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
मां नर्मदा का यह पावन तट आज बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जो सीधे-सीधे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी नींद से कब जागेंगे, या फिर मालपुर संगम यूं ही उपेक्षा की भेंट चढ़ता रहेगा।

