राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, मंगलवार 7 अप्रैल,आदिवासी बहुल डिंडोरी जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां पुलिस ने कानून का पालन तो किया, लेकिन इंसानियत को कुचल दिया। हादसे में ट्रक को तो थाने पहुंचा दिया गया, मगर घायल व्यक्ति को सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया गया।
गौरतलब है कि शाहपुर थाना अंतर्गत ग्राम नरिया निवासी पंचम तिलगाम को रविवार शाम करीब 7 बजे एक सीमेंट से लदे ट्रक (MP 54 H 0618) ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि वह मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गया।
ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची भी, लेकिन जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया, लेकिन घायल व्यक्ति को सड़क किनारे तड़पता छोड़ दिया।
पूरी रात पंचम तिलगाम दर्द से कराहता रहा, लेकिन न पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया, न ही उसकी सुध ली।
उधर, जब परिजन रात में थाने पहुंचे तो उन्हें गुमराह करते हुए कहा गया कि घायल को 112 से जिला अस्पताल भेज दिया गया है। परिजन अस्पताल दौड़े, लेकिन वहां कोई मरीज नहीं मिला।
रातभर परिजन थाने और अस्पताल के चक्कर काटते रहे, लेकिन पुलिस की बेरुखी और झूठे जवाबों ने उन्हें बेबस कर दिया।
हद तो तब हो गई जब अगले दिन सुबह गांव के कुछ लोग उसी रास्ते से गुजरे और घायल पंचम तिलगाम को सड़क किनारे पड़ा पाया। ग्रामीणों ने उसे मोटरसाइकिल से घर पहुंचाया, जहां वह गंभीर हालत में बिना इलाज के पड़ा है।
परिजनों का आरोप और भी गंभीर है। उनका कहना है कि जब उन्होंने थाना प्रभारी से मदद मांगी, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया — “पहले वाहन मालिक को आने दो, फिर सेटलमेंट करेंगे।”
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है। सवाल यह है कि क्या पुलिस अब सिर्फ गाड़ियों की जिम्मेदारी ले रही है, इंसानों की नहीं?
अब देखना होगा कि इस अमानवीय लापरवाही पर प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

