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आयुष्मान प्रोत्साहन राशि घोटाला: जांच में करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों की गड़बड़ी के संकेत, डॉ. सत्येन्द्र परस्ते पर विभागीय जांच की अनुशंसा

आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 13 मई,विकासखंड शहपुरा के खंड स्तरीय चिकित्सालय में आयुष्मान भारत निरामय योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि वितरण में अनियमितता संबंधी शिकायत को कलेक्टर ने गंभीरता से लेते हुए जांच कराई। जांच में कई बिंदुओं पर लापरवाही एवं वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने कलेक्टर द्वारा जिला स्तरीय गठित समिति में अनुविभागीय शहपुरा, पेंशन अधिकारी, जिला आयुषमान नोडल अधिकारी, जिला आयुषमान समन्वयक द्वारा जांच की गई। जांच के आधार पर डॉ. के विरूद्ध कार्यवाही हेतु कलेक्टर द्वारा उच्च अधिकारी को पत्र प्रेषित किया गया है। 

             जांच में पाया गया कि तत्कालीन मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी शहपुरा एवं वर्तमान में मेंहदवानी में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्येन्द्र परस्ते प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत होने के बावजूद चिकित्सक के रूप में अन्य डॉक्टरों की तुलना में कई गुना अधिक आयुष्मान प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर रहे थे। जांच प्रतिवेदन के अनुसार ड्यूटी रोस्टर में नाम नहीं होने के बावजूद उन्होंने मेडिकल स्पेशलिस्ट के रूप में राशि प्राप्त की।

           संयुक्त जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि डॉ. परस्ते द्वारा मेडिकल स्पेशलिस्ट के रूप में 30 प्रतिशत की दर से 7 लाख 1 हजार 992 रुपये 20 पैसे की राशि प्राप्त की गई, जबकि नियमानुसार उन्हें 10 प्रतिशत की दर से 2 लाख 33 हजार 997 रुपये 40 पैसे प्राप्त होना था। इस पर डॉ. परस्ते ने अपने जवाब में कहा कि वे मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे, इसलिए उन्हें 30 प्रतिशत की दर से राशि प्राप्त होना उचित है।

            जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ कर्मचारियों को एक वर्ष से अधिक मातृत्व अवकाश पर रहने के बावजूद उस अवधि की प्रोत्साहन राशि आवंटित की गई। वहीं, वार्डबॉय के रूप में कार्य नहीं करने वाले कर्मचारी आशुतोष रजक के खाते में भी प्रोत्साहन राशि डाली गई। कुछ कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद भी उन्हें राशि आवंटित किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई।

          मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्रस्तुत अभिमत में कहा गया कि जांच दल द्वारा दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण किए बिना प्राथमिक आधार पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। वहीं डॉ. परस्ते द्वारा दिए गए प्रतिउत्तर एवं जांच दल की रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर विरोधाभास पाया गया।

         प्रकरण में प्रस्तुत तथ्यों, जांच प्रतिवेदन, डॉ. परस्ते के जवाब एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अभिमत के आधार पर यह माना गया कि विस्तृत विभागीय जांच आवश्यक है। इसके चलते डॉ. सत्येन्द्र परस्ते के विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित किए जाने की अनुशंसा की गई है। विभागीय जांच के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


 

Ashish Joshi

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