आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 3 जून, जिले के जनपद शिक्षा केंद्र समनापुर अंतर्गत संचालित अंग्रेजी माध्यम कन्या आश्रम शाला में पिछले सत्र की अतिथि शिक्षक भर्ती को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय युवाओं और पात्र अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि निर्धारित योग्यता पूरी नहीं होने के बावजूद एक अभ्यर्थी को अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया, जबकि योग्य डीएड और बीएड धारक उम्मीदवार अवसर की प्रतीक्षा करते रह गए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि जिस पद के लिए डीएड अथवा बीएड की निर्धारित योग्यता आवश्यक मानी जाती है, उस पद पर पिछले सत्र में एक ऐसी युवती को नियुक्त किया गया, जो उस समय डीएड प्रशिक्षण पूर्ण नहीं कर पाई थी और द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। आरोप है कि नियमित रूप से कॉलेज में अध्ययन, उपस्थिति और इंटर्नशिप करने के साथ-साथ उसे अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य करने तथा मानदेय प्राप्त करने का अवसर भी मिला।
स्थानीय युवाओं का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया की जानकारी व्यापक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई, जिसके कारण अनेक पात्र अभ्यर्थी आवेदन ही नहीं कर सके। उनका कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित डीएड और बीएड धारक बेरोजगार युवा रोजगार की तलाश में हैं, लेकिन उन्हें समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अभ्यर्थी के परिवार की विभागीय पहचान और प्रभाव के कारण नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
युवाओं ने मांग की है कि यदि नियुक्ति नियमों के विपरीत की गई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियम विरुद्ध किए गए भुगतान की राशि सरकारी कोष में जमा कराई जाए।
पात्र अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें इस बात की चिंता है कि आगामी सत्र की अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में भी कहीं योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता न दी जाए। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित होनी चाहिए, ताकि सभी पात्र उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सके।
स्थानीय युवाओं और अभ्यर्थियों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो योग्य अभ्यर्थियों का भर्ती प्रक्रिया पर से विश्वास उठ सकता है।
अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इन आरोपों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हैं या फिर यह मामला भी केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है। आगामी सत्र की अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना विभाग के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

