ओमप्रकाश परस्ते की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, सोमवार 15 जून,डिंडौरी के रामगुड़ा गांव से सामने आया है एक ऐसा मामला, जिसने राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पटवारी और सरपंच की कथित मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी पुश्तैनी जमीन पर दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज करा दिया गया। आइए देखते हैं
डिंडौरी विकासखंड की ग्राम पंचायत रामगुड़ा में पैतृक भूमि को लेकर विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। वर्षों से जिस जमीन पर एक परिवार खेती करता आ रहा था, अब उसी जमीन के रिकॉर्ड में दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज होने से हड़कंप मच गया है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव के ही जेवन पिता मंगल के नाम को फर्जी तरीके से भूमि अभिलेखों में शामिल कर दिया गया, जबकि उनका परिवार से कोई रक्त संबंध या उत्तराधिकार संबंध नहीं है।
परिवार का दावा है कि इस पूरे मामले में फर्जी वंशावली तैयार की गई और उसी के आधार पर नामांतरण एवं फर्द बटवारे की कार्रवाई कर जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि फर्जी वंशावली में चैती बाई को स्वर्गीय गुलाब सिंह का मामा-ससुर दर्शाया गया है, जबकि आनंद पिता जेवन ने स्वर्गीय गुलाब सिंह को अपना नाना बताया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि ये रिश्ते वास्तविकता से बिल्कुल परे हैं और दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन हड़पने की कोशिश की गई है।
परिजनों का आरोप है कि तत्कालीन प्रक्रिया में ग्राम पंचायत रामगुड़ा के सरपंच और संबंधित पटवारी की कथित भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उनका कहना है कि बिना उचित जांच और सत्यापन के वंशावली प्रमाणित कर दी गई, जिसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किया गया।
इधर मामला उस समय और गरमा गया जब राजस्व विभाग की टीम सीमांकन करने मौके पर पहुंची। ग्रामीणों का आरोप है कि सीमांकन से पहले उन्हें कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई। कार्रवाई शुरू होते ही मौके पर विरोध शुरू हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
पीड़ित परिवार लगातार तहसील और एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रहा है। उनका कहना है कि यदि रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की जाए तो पूरा मामला उजागर हो सकता है। वहीं ग्रामीण भी इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाएंगे।
"रामगुड़ा का यह विवाद अब सिर्फ एक जमीन का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि क्या राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी वंशावली के आधार पर किसी की पैतृक संपत्ति पर दावा किया जा सकता है? क्या आरोपों में सच्चाई है या फिर यह महज एक पारिवारिक विवाद है? इसका जवाब अब प्रशासनिक जांच और आने वाली कार्रवाई ही देगी। फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों और पीड़ित परिवार की नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।

