राजेश ठाकुर की रिपोर्ट
ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति चिंताजनक
आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 10 जून,ग्रामीण आबादी बाहुल्य क्षेत्र विक्रमपुर के अंतर्गत आने वाले अधिकांशतः आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (NHM)में कार्यालीन दिवसों में भी ताले लटके रहते हैं, या फिर इनके कर्मचारियों के मन मुताबिक समय और दिन में इनका संचालन किया जा रहा है। नियमित और निर्धारित समय में इन केन्द्रों का संचालन ना होने से ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए भी भटकना पड़ रहा है। हकीकत यह है कि इन केन्द्रों के कर्मचारी सरकारी वेतन लेकर नाम मात्र की उपस्थिति दर्ज कराते हैं। और उपचार के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। ज्यादा समय अपने निजी कार्यों में लगे रहते हैं। परिणाम यह है कि मरीज सरकारी केन्द्रों से निराश होकर निजी अस्पतालों, झोलाछाप डाक्टरों, की महंगी लूट का शिकार होने को मजबूर है। ए एन एम, एम पी डब्ल्यू, और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सीएच ओ, मुख्यालय पर नहीं रहते हैं। जिससे ग्रामीणों को न टीकाकरण का लाभ मिल पाता है और न ही बुनियादी उपचार। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन केन्द्रों के लिए भेजी जाने वाली दवाइयां आखिर कहाँ जाती हैं? यह रहस्य बन चुका है। लेकिन ना तो जांच होती है और न ही जिम्मेदारों पर कोई कार्यवाही। आशा कार्यकर्ताओं की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है लापरवाही और उदासीनता के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा तंत्र पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। क्या सरकारी आयुष्मान आरोग्य मंदिर सिर्फ सरकारी बजट खर्च करने का जरिया बन गए है। क्या स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी पर कोई लगाम नहीं लगेगी। ग्रामीण क्षेत्र की जनता की स्पष्ट मांग है कि इन केन्द्रों का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए। अनुपस्थित रहने वाले एएन एम, एम पी डब्ल्यू, और सी एच ओ, पर कड़ी कार्यवाही की जाए। दवाइयों की स्वतंत्र जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्रों को वास्तव में सक्रिय और उपयोगी बनाया जाए। नहीं तो सरकारी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित रह जायेगी।

