नियमित कक्षाएं, अनुशासन, नवाचार और जल संरक्षण को लेकर दिए सख्त निर्देश
राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, गुरुवार 16 जुलाई, उच्च शिक्षा विभाग, जबलपुर संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. अल्केश चतुर्वेदी ने डिंडोरी जिले के पांच शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों का औचक निरीक्षण कर शैक्षणिक व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की पहचान केवल भवनों से नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से होती है।
डॉ. चतुर्वेदी ने सबसे पहले प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय चंद्र विजय महाविद्यालय, डिंडोरी का निरीक्षण किया। उन्होंने कक्षाओं का भ्रमण कर विद्यार्थियों से संवाद किया तथा प्राध्यापकों को नियमित अध्यापन, डेली डायरी संधारण, समयबद्ध पाठ्यक्रम पूर्ण करने और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक की जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।
इसके बाद उन्होंने मेकलसुता अशासकीय महाविद्यालय पहुंचकर शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षा परिणामों और शिक्षकों की उपस्थिति की समीक्षा की। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों, करियर काउंसलिंग एवं कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
शासकीय आदर्श मॉडल महाविद्यालय, डिंडोरी में उन्होंने पुस्तकालय, प्रयोगशाला, उपस्थिति पंजी तथा अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराया जाए और प्रत्येक कक्षा निर्धारित समय पर संचालित हो।
भ्रमण के अंतिम चरण में शासकीय मॉडल महाविद्यालय एवं शासकीय महाविद्यालय, शाहपुरा का निरीक्षण करते हुए उन्होंने महाविद्यालय परिसर की स्वच्छता, विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित निराकरण तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने प्राचार्यों से कहा कि संस्थान की छोटी-छोटी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाए ताकि अध्ययन-अध्यापन प्रभावित न हो।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था का भी लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान डॉ. चतुर्वेदी ने सभी पांचों महाविद्यालयों में स्थापित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान को इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने वर्षा जल के अधिकतम संग्रहण एवं भू-जल संवर्धन के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सभी महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अतिरिक्त संचालक ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और नवाचार के माध्यम से विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


