गोरे हनुमन्त की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, सोमवार 27 जुलाई, जिले की ग्राम पंचायत पड़रिया कला के पोषक ग्राम हर्रा टोला से समाज की पंचायत के फैसले को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। एक युवक ने आरोप लगाया है कि वैवाहिक विवाद के बाद समाज की पंचायत ने उससे ₹85,500 की राशि वसूल ली, परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया और मंदिर में प्रवेश सहित सार्वजनिक जल स्रोत से पानी लेने तक में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। पीड़ित ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
हर्रा टोला निवासी संदीप कुमार ने अपने आवेदन में बताया कि उसका विवाह 11 मई 2025 को हिंदू रीति-रिवाज से पुष्पा नागेश के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके बाद मामला समाज की पंचायत तक पहुंचा।
आवेदन के अनुसार, पंचायत में दोनों को अलग रहने का निर्णय सुनाया गया और कथित रूप से ₹85,500 की राशि जुर्माने के रूप में वसूल की गई। संदीप का आरोप है कि इसके बाद उसके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया और समाज के लोगों ने उनके साथ सभी सामाजिक संबंध समाप्त कर दिए।
पीड़ित के मुताबिक, कुछ समय बाद उसकी पत्नी स्वयं वापस उसके घर आकर रहने लगी, लेकिन बाद में फिर मायके चली गई। इसके बाद समाज के कुछ लोगों द्वारा दोबारा दोनों को अलग रहने का दबाव बनाया गया। संदीप का आरोप है कि पत्नी को वापस लाने जाने पर उसके साथ गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार और मारपीट का प्रयास किया गया। साथ ही उसके विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें वह वर्तमान में जमानत पर है।
संदीप ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि उसके माता-पिता ने कई गांवों के सामाजिक लोगों को बुलाकर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन लड़की पक्ष के लोग पंचायत में शामिल नहीं हुए। इसके बावजूद परिवार का सामाजिक बहिष्कार जारी रखा गया।
पीड़ित का आरोप है कि उसके परिवार को गांव के मंदिर में प्रवेश से रोक दिया गया, मंदिर में ताला लगा दिया गया तथा सार्वजनिक जल स्रोत से पानी भरने पर भी उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस कारण परिवार का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है।
संदीप कुमार ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कथित रूप से वसूली गई ₹85,500 की राशि वापस दिलाई जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए तथा उसके परिवार को सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न से मुक्त कर न्याय दिलाया जाए।
फिलहाल यह पूरा मामला पीड़ित द्वारा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन तथा उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इस संबंध में संबंधित पक्ष का बयान सामने नहीं आया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस शिकायत की जांच के बाद क्या कार्रवाई करते हैं। .


