राजेश ठाकुर की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, सोमवार 27 जुलाई, ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में बारिश के बाद मौसमी बीमारियां सर्दी,जुकाम, बुखार, उल्टी दस्त, और गंभीर मामलों में टाइफाइड जैसे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के हाल बेहाल हैं। विक्रमपुर खंड के अंतर्गत आने वाले अधिकांश आरोग्य मंदिर कार्यालीन दिवसों में भी ताले में बंद रहते हैं।या फिर इनके कर्मचारी अपने सुविधानुसार, मन मुताबिक अपने समय और दिन में इन केन्द्रों का संचालन करते हैं। जिससे ग्रामीण जनों को प्राथमिक उपचार के लिए भी भटकना पड़ रहा है। इनके लापरवाही और उदासीनता का खामिया़जा ग्रामीण जन निजी अस्पतालों में उपचार करा कर अपनी गाढ़ी कमाई लुटा कर अदा कर रहे हैं। मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए ना तो कोई जनजागरुकता के कार्यक्रम आयोजित किया जाता है और ना स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीण जनों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। बस नाम मात्र की उपस्थिति और उपचार के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है। कुल मिलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बहुत ही सीमित है। पूरे क्षेत्र में रात्रि कालीन स्वास्थ्य सेवाएं शून्य हो जाती हैं। स्वास्थ्य कर्मी जहाँ पदस्थ हैं, वहाँ मुख्यालय बनाकर नहीं रहते हैं। क्या आयुष्मान आरोग्य मंदिर सरकारी स्वास्थ्य बजट खर्च करने का जरिया बन गए हैं। क्या स्वास्थ्य कर्मियों के मनमानी पर कोई रोक नहीं लगेगी।क्षेत्रीय ग्रामीण जनों की स्पष्ट मांग है कि उच्चाधिकारी और जनप्रतिनिधि इन स्वास्थ्य केन्द्रों का सघन औचक निरीक्षण करें।निरीक्षण के दौरान केन्द्र बंद रहने, निर्धारित समय और दिन में संचालन ना होने, तथा अनुपस्थित रहने पर नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाए। जो स्वास्थ्य कर्मी जहाँ पदस्थ है वही पर मुख्यालय बनाकर रहना अनिवार्य किया जाए। ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को वास्तव में सक्रिय और उपयोगी बनाया जाए। जिससे ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ग्रामीण जनों को आवश्यकता और सुविधा के अनुसार मिल सके।

