गोरे हनुमन्त की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 17 जुलाई, जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर विकासखंड डिंडौरी के एकीकृत माध्यमिक शाला नयेगांव रैयत की स्थिति सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत बयां करती है। यहां पहली से आठवीं तक के बच्चों की पढ़ाई एक ही छत के नीचे कराई जा रही है, जबकि माध्यमिक शाला का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। स्कूल प्रबंधन द्वारा लंबे समय से शिक्षा विभाग को भवन की मरम्मत अथवा वैकल्पिक भवन उपलब्ध कराने की जानकारी दी जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्कूल में अध्ययनरत बच्चों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही। उनका आरोप है कि शिक्षक देर से पहुंचते हैं और निर्धारित समय से पहले ही वापस चले जाते हैं। ऐसे में कई बार कक्षाएं प्रभावित होती हैं और पढ़ाई अधूरी रह जाती है।
मध्यप्रदेश शासन के सेवा नियमों के अनुसार शासकीय कर्मचारी का मुख्यालय वही माना जाता है जहां उसकी पदस्थापना है। यदि कोई कर्मचारी किसी अन्य स्थान, जैसे जिला मुख्यालय में निवास करता है और प्रतिदिन अप-डाउन करता है, तो सामान्यतः उसे सक्षम अधिकारी अथवा संस्था प्रमुख की अनुमति लेकर यह सुनिश्चित करना होता है कि उसके आवागमन से शासकीय कार्य प्रभावित न हो।
इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था (सार्थक/जीआईएस आधारित उपस्थिति प्रणाली) के अनुसार शिक्षक को विद्यालय परिसर अथवा निर्धारित जियो-फेंस (लगभग 200 मीटर के दायरे) में ही लॉगिन और लॉगआउट करना होता है। निर्धारित कार्यावधि (लगभग 6 घंटे) पूरी होने के बाद ही लॉगआउट संभव होता है। यदि शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचते या समय से पहले निकल जाते हैं तो उपस्थिति प्रभावित हो सकती है और नियमानुसार वेतन पर भी असर पड़ सकता है।
जब शासन ने समयबद्ध उपस्थिति और विद्यालय में निर्धारित अवधि तक उपस्थित रहने के स्पष्ट प्रावधान किए हैं, तब यदि शिक्षक प्रतिदिन लंबी दूरी के कारण देर से पहुंचते हैं और समय से पहले लौटते हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या व्यक्तिगत सुविधा के लिए विद्यार्थियों के भविष्य से समझौता किया जा सकता है?
दूसरी ओर, एक ही कमरे में पहली से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित होना और जर्जर भवन के बावजूद विभाग द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करना भी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।


