गोरे हनुमन्त की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, शनिवार 18 जुलाई जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर विकासखंड डिंडौरी के एकीकृत माध्यमिक शाला नयेगांव रैयत में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। स्कूल के बच्चों ने आरोप लगाया कि उन्हें कभी भी शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता। इतना ही नहीं, कई बार खाने में कीड़े-मकोड़े तक निकल आते हैं, जिससे बच्चों में भय और नाराजगी है।
जब बच्चों से पूछा गया कि क्या उन्होंने इसकी शिकायत स्कूल के शिक्षकों से की, तो बच्चों ने बताया कि शिकायत करने पर उन्हें कहा जाता है कि "खा लो, कुछ नहीं होगा। क्या तुम्हारे घर के खाने में कभी कुछ नहीं निकलता? क्या घर का खाना फेंक देते हो?" बच्चों के इस बयान ने स्कूल में मध्यान्ह भोजन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की वास्तविक जानकारी लेने पर स्कूल के सहायक शिक्षक अशोक कुमार गवले ने भी व्यवस्था में खामियों को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि विद्यालय में दो अलग-अलग स्व-सहायता समूहों द्वारा भोजन बनाया जाता है और दोनों के अपने-अपने रसोइये हैं। कई बार समझाइश देने के बावजूद उनकी बात नहीं मानी जाती।
सहायक शिक्षक ने बताया कि उन्होंने कई बार रसोइयों से कहा कि भोजन परोसने से पहले नियमानुसार भोजन का सैंपल सुरक्षित रखें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया जाता। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विद्यालय में न तो मीनू के अनुसार भोजन बनता है और न ही स्वच्छता के मानकों का पालन किया जाता है।
शिक्षक की इस स्वीकारोक्ति ने मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। यदि भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है और कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है।
अब सवाल यह है कि जब स्वयं स्कूल के शिक्षक व्यवस्था में खामियों की पुष्टि कर रहे हैं, तब जिम्मेदार अधिकारी अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए? क्या शिक्षा विभाग और मध्यान्ह भोजन योजना के जिम्मेदार अधिकारी बच्चों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, या फिर व्यवस्था इसी तरह भगवान भरोसे चलती रहेगी?

