आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 22 जुलाई, महिला एवं बाल विकास विभाग में जारी स्थानांतरण आदेशों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग द्वारा 17 जून 2025 को जारी स्थानांतरण आदेशों का आज तक पूर्ण रूप से पालन नहीं कराया गया है। सूची में शामिल कई कर्मचारी अभी भी अपने पुराने पदस्थापना स्थल पर कार्यरत हैं, जबकि आदेश के अनुसार उन्हें सात दिनों के भीतर नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य था।
जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, डिंडौरी द्वारा आदेश क्रमांक 298, दिनांक 17 जून 2025 के माध्यम से कर्मचारियों के स्थानांतरण किए गए थे। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को सात दिन के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होगा। इसके बावजूद कई कर्मचारियों ने न तो नए स्थान पर कार्यभार संभाला और न ही उन्हें वहां भेजा गया।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्थानांतरण आदेश निरस्त अथवा स्थगित नहीं किया गया है, तो कर्मचारियों का पुराने स्थान पर बने रहना शासन के नियमों और प्रशासनिक अनुशासन का सीधा उल्लंघन है। इससे यह भी प्रतीत होता है कि विभागीय स्तर पर शासन के आदेशों का पालन सुनिश्चित नहीं कराया गया।
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही यह जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई है कि स्थानांतरण सूची में शामिल कौन-कौन से कर्मचारी आज भी पुराने स्थान पर कार्यरत हैं और किन परिस्थितियों में उन्हें वहां बनाए रखा गया है।यदि बिना सक्षम आदेश के कर्मचारियों से पुराने स्थान पर कार्य कराया जा रहा है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को तत्काल उनके नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण कराना सुनिश्चित किया जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। यह मामला केवल स्थानांतरण आदेशों के पालन का नहीं, बल्कि शासन के आदेशों की प्रभावशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।

