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डिंडौरी नगर परिषद के ई-टेंडर में दस्तावेजों से छेड़छाड़ और फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप, डीजल खरीदी की भी जांच की उठी मांग

आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 22  जुलाई, नगर परिषद डिंडौरी की  ई-निविदाओं को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। 9 दिसंबर 2025 की निविदा प्रक्रिया के दौरान मूल दस्तावेजों से कथित रूप से छेड़छाड़ कर संशोधित दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए गए, जिनके आधार पर पूरी निविदा प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी को होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

शिकायत पत्र में यह भी दावा किया गया है कि निविदा के मूल अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ कर जबलपुर संयुक्त संचालक (जेडी) कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षरों का कथित रूप से फर्जी उपयोग किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह शासकीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ और गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

शिकायत में केवल निविदा प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि नगर परिषद में डीजल खरीद और उसके उपयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संबंधित उपयंत्री (संविदा) शिवराज बघेल के पास डीजल खरीद, वितरण और प्रभार का दायित्व होने के कारण डीजल खरीदी, भुगतान, स्टॉक, वाहनों की खपत तथा संबंधित अभिलेखों में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। इसलिए इन सभी रिकॉर्ड का स्वतंत्र वित्तीय एवं तकनीकी ऑडिट कराए जाने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में मांग की है कि दोनों ई-निविदाओं की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही मूल दस्तावेजों, फाइनेंशियल बिड और ऑनलाइन अपलोड किए गए अभिलेखों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की दस्तावेजी छेड़छाड़ की पुष्टि हो सके।

इसके अलावा जांच पूरी होने तक संबंधित दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है, जिससे साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।

शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज कर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी अथवा सक्षम जांच एजेंसी से कराकर जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक किए जाने की भी मांग की गई है।



 

Ashish Joshi

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