शाहपुर की महारानी, मां महाकाली और मां दुर्गा का निकला भव्य चल समारोह, घुंसी नदी में कराया जलविहार; रावण दहन के साथ विजयादशमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया
राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 21 अक्टूबर, क़स्बा में शाहपुर आस्था की आराधना, भक्ति की भावधारा और मां जगदंबा के प्रति अटूट श्रद्धा का साक्षी बना कस्बा शाहपुर। शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक माता रानी की आराधना में लीन रहे श्रद्धालुओं ने विजयादशमी के पावन अवसर पर मां दुर्गा, मां महाकाली और शाहपुर की महारानी को भावुक मन से विदाई दी। माता रानी के जयकारों, बैंड-बाजों की गूंज, डीजे की भक्तिमय धुनों और आकर्षक आतिशबाजी के बीच निकले भव्य चल समारोह ने पूरे नगर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। विदाई की बेला में जहां श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्सव का उल्लास था, वहीं मां के विग्रह से बिछड़ने की भावुकता भी स्पष्ट दिखाई दी।
नौ दिनों तक माता के दरबारों में उमड़ता रहा श्रद्धा का सैलाब
शारदीय नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही कस्बा शाहपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भक्ति और उत्साह का वातावरण निर्मित हो गया था। मुख्य बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर परिसर में विराजित शाहपुर की महारानी, पंचायत प्रांगण एवं कॉलोनी में विराजित मां महाकाली तथा साहू मोहल्ला स्थित कर्मा देवी मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं के समक्ष नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
प्रतिदिन प्रातःकालीन आरती और संध्या महाआरती में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही। माताएं-बहनें, युवा और बच्चे माता रानी के दर्शन कर परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करते रहे। देवी गीतों, भजनों और जयकारों से कस्बे का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। नवरात्र के इन नौ दिनों में श्रद्धा, सेवा, समर्पण और सामूहिक सहभागिता की सुंदर तस्वीर देखने को मिली।
भव्य चल समारोह में उमड़ा जनसैलाब
विजयादशमी के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए भव्य चल समारोह निकाला गया। सर्वप्रथम विभिन्न पंडालों में विराजित प्रतिमाएं मुख्य बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर परिसर में एकत्रित हुईं। संध्या आरती के पश्चात माता रानी को विदाई देने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
‘जय माता दी’, ‘जय मां दुर्गा’ और ‘मां महाकाली की जय’ के गगनभेदी उद्घोष से नगर का वातावरण गुंजायमान हो उठा। बैंड-बाजों की स्वर लहरियों, डीजे की भक्तिमय धुनों और आतिशबाजी के बीच निकले चल समारोह में श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। माता रानी के गीतों पर झूमते भक्तों और जयकारे लगाती माताओं-बहनों ने पूरे आयोजन को भव्यता प्रदान की।
चल समारोह नगर के मुख्य मार्ग से होते हुए प्राचीन बूढ़ी माई मंदिर पहुंचा, जहां खेल मैदान में रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया गया। विजयादशमी के इस प्रसंग ने धार्मिक उत्साह के साथ भारतीय संस्कृति की परंपरा को भी जीवंत किया।
घुंसी नदी में विधि-विधान से हुआ प्रतिमाओं का जलविहार
रावण दहन के पश्चात चल समारोह बैंड-बाजों और माता रानी के जयकारों के साथ स्थानीय घुंसी नदी पहुंचा। यहां सभी प्रतिमाओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने शाहपुर की महारानी, मां महाकाली एवं मां दुर्गा की प्रतिमाओं को भावपूर्ण विदाई देते हुए जलविहार कराया।
मां की विदाई के समय श्रद्धालुओं की भावनाएं उमड़ पड़ीं। जिन दरबारों में नौ दिनों तक भक्तों ने माथा टेककर सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की थी, उन्हीं दरबारों की विदाई के क्षण भावुक कर देने वाले रहे। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर मां जगदंबा से क्षेत्र में सुख-शांति, खुशहाली और सभी के जीवन में मंगल बनाए रखने की प्रार्थना की।
भक्ति, परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश दे गया आयोजन
शाहपुर में आयोजित दुर्गा प्रतिमा चल समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज को एक सूत्र में पिरोने और सामूहिक आस्था को सशक्त बनाने का माध्यम भी हैं। नवरात्र के दौरान पंडालों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और विजयादशमी पर निकला भव्य चल समारोह कस्बे की धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बना।
माता रानी की विदाई के साथ ही श्रद्धालुओं के मन में अगले वर्ष उनके पुनः आगमन की प्रतीक्षा जाग उठी। भक्तों के भावपूर्ण स्वर गूंजते रहे— “मां, अगले बरस तू जल्दी आना, अपने भक्तों पर कृपा बरसाना।”
नौ दिनों की आराधना, विजयादशमी के उल्लास और विदाई की भावुक बेला के साथ कस्बा शाहपुर में शारदीय नवरात्र का समापन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में हुआ।

