कलंगी टोला बघर्रा रैयत में पुलिया या स्टॉप डैम-कम-काजवे निर्माण की मांग तेज, 35–40 परिवारों की आवाजाही प्रभावित; स्कूली बच्चों और मरीजों को भी उठानी पड़ रही परेशानी
राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, गुरुवार 22 अक्टूबर, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी किस तरह आमजन के लिए मुसीबत बन जाती है, इसकी तस्वीर ग्राम पंचायत पांकर बघर्रा के कलंगी टोला बघर्रा रैयत से सामने आए एक वीडियो में देखने को मिल रही है। यहां सिलगी नदी पर आवागमन के लिए सुविधाजनक व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे गंभीर स्थिति तब बन जाती है, जब किसी बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को उपचार के लिए ले जाना हो।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 का बताया जा रहा यह वीडियो एक ऐसी महिला को नदी पार कर ले जाने का है, जिसे प्रसव के लिए शहपुरा ले जाया जा रहा था। महिला की पहचान यशोदा मरकाम, पति राजेश मरकाम के रूप में बताई गई है। राहत की बात यह है कि शहपुरा में सामान्य प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस घटना ने क्षेत्र में आवागमन की समस्या और ग्रामीणों की मुश्किलों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
35–40 परिवारों की आवाजाही का सवाल
ग्रामीणों के अनुसार, सिलगी नदी के दूसरी ओर लगभग 35 से 40 घरों की बस्ती है। नदी पर पर्याप्त आवागमन व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां के लोगों को जरूरी कामों के लिए आने-जाने में परेशानी होती है। स्कूली बच्चों को भी नदी पार कर विद्यालय जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं, बीमारी या प्रसव जैसी आपात स्थिति में मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी नदी पार करना कठिन होता है, जबकि बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है। नदी में पानी बढ़ने पर आवागमन जोखिम भरा हो सकता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियों और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होती है।
पुलिया या काजवे-कम-स्टॉप डैम निर्माण की मांग
क्षेत्र के ग्रामीण सिलगी नदी पर पुलिया अथवा उपयुक्त तकनीकी सर्वेक्षण के आधार पर काजवे-कम-स्टॉप डैम का निर्माण कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यहां सुरक्षित आवागमन की स्थायी व्यवस्था हो जाए, तो बस्ती के परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही, स्कूली बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और अन्य ग्रामीणों को नदी पार करने में होने वाली परेशानियों से भी निजात मिल सकती है।
जिम्मेदारों से ग्रामीणों को उम्मीद
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारी स्थल का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति का आकलन करें तथा नदी की भौगोलिक स्थिति, जलप्रवाह और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप समाधान तलाशें। ग्रामीणों की मांग है कि इस समस्या को प्राथमिकता से लेते हुए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज या गर्भवती महिला को नदी पार कराने के लिए इस तरह की कठिन परिस्थिति का सामना न करना पड़े।




