भोपाल । आईविटनेस न्यूज़ 24 - मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पताल हमीदिया में 12 दिसंबर शुक्रवार को घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां पर बिजली गुल होने के कारण वेंटिलेटर सपोर्ट वाले कोरोना के तीन मरीजों की मौत हो गई। मामल उजागर होने पर मध्य प्रदेश सरकार ने न केवल पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं बल्कि हमीदिया अस्पताल के मेंटिनेंस इंजीनियर को बर्खास्त भी कर दिया है।
हमीदिया अस्पताल मैं कोरोना वायरस को लेकर अलग से बनाए गए वार्ड में 11 मरीज भर्ती थे। इनमें से गंभीर हालत के कारण चार मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया था। अचानक अस्पताल की बिजली गुल हो गई। स्टाफ ने तुरंत जनरेटर चलाया।
जनरेटर भी एयर लेने के कारण महज दस मिनट में ही बंद हो गया। बिजली जाने के बाद डॉक्टरों ने मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। एक के बाद एक करके वेंटिलेटर सपोर्ट वाले कोरोना वायरस के तीन मरीजों की मौत हो गई। चार में से केवल एक मरीज को बचाया जा सका।
हमीदिया अस्पताल में बिजली गुल होने के कारण कोरोना मरीज की मौत मामले में जांच शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक्शन मोड में आने के बाद सब इंजीनियर राकेश बर्वे को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही डिविजनल कमिश्नर कवींद्र कियावत ने पीडब्ल्यूडी और एमपीईबी के अफसरों के साथ हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक आईडी चौरसिया को तलब किया है।
अस्पताल में जनरेटर मेंटनेंस करने वाले ठेकेदार को भी बुलाया गया है। कमिश्नर के सामने ठेकेदार के कर्मचारियों के बयान हुए हैं। पड़ताल में सामने आया है कि पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री एम एस पवार पिछले डेढ़ साल से हमीदिया अस्पताल में होने वाली एक भी बैठक में नहीं गए। नियमानुसार अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर प्रबंधन स्तर पर हर माह बैठक होती है। सूत्रों से लगी जानकारी के अनुसार पवार एक भी बैठक में नहीं गए। जिस सब इंजीनियर राकेश बर्वे को निलंबित किया गया है, वह बैठकें अटैंड करता था।
