मद में बढ़ोतरी होगी। वहीं, हाथ में आने वाला पैसा (टेक होम
सैलरी) घटेगा। यहां तक कि कंपिनयों की बैलेंस शीट भी प्रभावित
होगी। इसकी वजह है पिछले साल संसद में पास किए गए तीन
मजदूरी संहिता विधेयक (कोड ऑन वेजेज बिल)। इन विधेयकों के
अगले साल 1 अप्रैल से लागू होने की संभावना है।
घट जाएगा कैश इन हैंड
वेज (मजदूरी) की नई परिभाषा के तहत भत्ते कुल सैलेरी के
अधिकतम 50 फीसदी होंगे। इसका मतलब है कि मूल वेतन
(सरकारी नौकरियों में मूल वेतन और महंगाई भत्ता) अप्रैल से कुल
वेतन का 50 फीसदी या अधिक होना चाहिए। गौरतलब है कि देश
के 73 साल के इतिहास में पहली बार इस प्रकार से श्रम कानून में
बदलाव किए जा रहे हैं।
