शहपुरा-आई विटनेस न्यूज 24, स्नातक महाविद्यालय, शहपुरा में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा "वैश्विक महामारी कोविड-19 के पश्चात आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना" का विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से आयोजन किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। राष्ट्रीय वेबीनार के आयोजन सचिव डॉ विमल कुमार कौशले के द्वारा विषय की रूपरेखा एवं अतिथि परिचय कराया गया। एवं साथ ही बताया कि भारत को विश्व पटल पर विकसित देशों की श्रेणी में लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है इसी कड़ी में आत्म भारत अभियान की मूल धारणा के अनुसार एक महत्वकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य सिर्फ कोविड-19 महामारी की दूसरों से लड़ना नहीं बल्कि भविष्य के भारत का निर्माण करना है ।
वेबीनार में मुख्य अतिथि तपेश्वर कपिल देव मिश्र कुलपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर व विशिष्ट अतिथि डॉ लीला भलावी अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग जबलपुर संभाग साथ ही प्राध्यापकों सहायक अध्यापकों सहित 200 से अधिक शोधार्थियों की सहभागिता रही मुख्य वक्ता के रूप में भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपति की पद कोसों शोभित करने वाले प्रो एडी.एन बाजपेयी आचार्य रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर
उन्होंने अपने उद्बोधन में आत्मनिर्भरता के सूत्र को आत्म सम्मान का प्रतीक बताते हुए कहा कि, भारत कभी भी निर्भर नहीं रहा वह केवल सत्तात्मक रूप से कमजोर हुआ लेकिन समाज की जड़ों में उसकी निर्भरता सदैव बनी रहे इसलिए सारे अक्रांताओं को यहां से जाना पड़ा उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता किसी एक क्षेत्र या किसी क्षेत्र या विशेष वर्ग की निर्भरता न होकर सारे क्षेत्र सारे समाज के लिए समानता से तात्पर्य है।हमारी आर्थिक व्यवस्था विषमता वादी है इसलिए हम हैं गांव की तरफ विशेष कर ध्यान देना होगा क्योंकि आप निर्भरता के स्रोत ग्रामीण स्तर पर ज्यादा है बस उन्हें कौशल को विकसित करके उत्पादन से जोड़ना होगा।
विषय विशेषज्ञ डॉक्टर नरेंद्र कुमार कोष्टी के द्वारा सरकार के विभिन्न आंकड़ों को मुख्य बिंदु में रखते हुए 2020 की नई शिक्षा नीति को कौशल के विभिन्न आयामों से जोड़ते हुए बताया कि कैसे हम कौशल की माध्यम से ग्रामीण स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हम कैसे अपने आप को स्थापित कर सकते हैं।
सारस्वत अतिथि के रूप में मेकलसूता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.बिहारी लाल द्विवेदी ने अपने वक्तव्य में स्वरोजगार की ओर प्रेरित होकर आत्मनिर्भर होने की बात कही।
कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ प्रमोद तिवारी ने कहा कि भारत सनातन से ही विश्व गुरु था किंतु मध्यकाल में सोने की चिड़िया कहे जाने वाले देश को कुछ विदेशी आक्रांता द्वारा इसे पीछे करने का प्रयास किया गया किंतु यह देश अपने आत्मबल से उन्हें उठ खड़ा हुआ आज वर्तमान में वैश्विक महामारी के दौरान
को-वैक्सीन का निर्माण करके फिर विश्व का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
संयोजक व विभाग की प्रमुख श्रीमती कविता धुर्वे ने अपने वक्तव्य में कहा कि जिस प्रकार अर्थशास्त्र के जनक के रूप में एडम स्मिथ को जाना जाता है ठीक उसी प्रकार से आध्यात्मिक अर्थशास्त्र के जनक के रूप में मैं आदरणीय प्रोफेसर एडीएन वाजपेई जी को देखना चाहती हूं।
कार्यक्रम के संरक्षक शासकीय स्नातक महाविद्यालय शहपुरा के प्राचार्य सी एस परस्ते जी द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी विद्वान जनों के प्रति अभिवादन व आभार व्यक्त कर,कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आइक्यूएसी के संयोजक प्रो. एस बी उरेती , कार्यक्रम का संचालन प्रो. विकास जैन जी ने किया।तकनीकी सहयोगी के रुप में डॉ.निरंजन सिंह पटेल व अजय जी रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के सहयोगी प्रो.अजय भूषण डॉ. एस एस. धुर्वे , भागवत झारिया, डॉ महेश भूपति, डॉ स्मिता गुप्ता, केदार सिंह माधवी, चमन भानुवंशी प्रमेश कुमार, प्रियंका उपाध्याय, राजेश डहेरिया,भी एवं साहू, राजेश पाठक, पंकज झारिया एवं महाविद्यालय समस्त सटाॅफ का विशेष सहयोग रहा।
