डिण्डोरी-आई विटनेस न्यूज 24,डिंडोरी जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के पास आ रहे आवेदनों को देखकर ऐसा लगता है मानो जिले में चल रही अव्यवस्था व असंवैधानिक कृत्यों से जिला प्रशासन भी असमंजस में होगा।जिसका एक उदाहरण जिले की गाड़ासरई ग्राम पंचायत, जो कि बजाग जनपद पंचायत के अंतर्गत है। लेकिन जिले के राजनैतिक व भौगोलिक परिदृश्य में गाड़ासरई जिले का कुवैत है, कुवैत इसलिए कि जिले के इस व्यवसायिक केंद्र में सुई से लेकर कीमती से कीमती सामान खरीद सकते हैं। एक समय था जब यही गाड़ासरई जिले में डकैतों का पसंदीदा स्थल के नाम से जाना जाता था तब तत्कालीन जिला प्रशासन द्वारा निर्णय लिया गया कि गाडासरई में पुलिस चौकी संचालित की जाए आदिम जाति कल्याण विभाग के अधीनस्थ भूमि में जहां पूर्व में स्कूल संचालित था उसी स्थान पर पुलिस चौकी की स्थापना की गई थी यह शायद देश प्रदेश का पहला मामला होगा जहां स्कूल बंद करवा कर चौकी थाना की स्थापना की गई होगी
इस पूरे मामले में दिलचस्प बात यह है कि थाना प्रभारी द्वारा जिले की मुखिया को पत्र लिखकर पुलिस थाना के अधिकारियों कर्मचारियों पर धौंस जमाने के आरोप अतिक्रमणकारियों पर लगाते हुए थाना परिसर में जप्तसुदा संपत्ति को रखने में अतिक्रमण होने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है थाना परिसर में लगी भूमि में जबरदस्ती दीवाल खड़ा कर लिया गया है एवं पुलिस विभाग की ओर से लगाया गया सौर ऊर्जा लाइट का खंबा भी बनाई गई दीवार के अंदर कर लिया गया है जिसे अतिक्रमण से मुक्त कराने की गुहार लगाई गई है।
वही गाडासरई ग्राम पंचायत के सरपंच ने अतिक्रमण कारियों के अतिक्रमण पर आपत्ति प्रमाण पत्र जारी कर आपत्ति जताई है।
एक ओर मध्यप्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा ऐसे अवैध भू माफियायो के खिलाफ बड़ी मुहिम चलाई जा रही है
वंही मिली जानकारी के अनुसार कुछ लोगों ने इस विषय की शिकायत सी एम हेल्प लाइन 181में भी किये है जिसका निराकरण आज तक नही हुआ है
और सी एम हेल्पलाइन की शिकायत चौथे लेवल मान.संभागीय कमिश्नर जबलपुर के पास तक पहुंच चुका है।पर शिकायत करता को संबंधित राजस्व अधिकारियों के द्वारा सी एम हेल्पलाइन को बंद करने की हिदायतें तो दी जाती है पर निराकरण नही।
और सी एम हेल्पलाइन की शिकायत चौथे लेवल मान.संभागीय कमिश्नर जबलपुर के पास तक पहुंच चुका है।पर शिकायत करता को संबंधित राजस्व अधिकारियों के द्वारा सी एम हेल्पलाइन को बंद करने की हिदायतें तो दी जाती है पर निराकरण नही।
आखिर बात क्या है जब पानी इतने सर से ऊपर हो चुका है इसके बाद भी कोई कार्यवाही नही हो पा रही है।
