आई विटनेस न्यूज 24,वैज्ञानिकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन से लाभ और आमदनी के वैकल्पिक स्रोतों पर विस्तार से की चर्चा 15 अगस्त, 2022 को देश की आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए 75वीं वर्षगांठ से पूर्व आजादी का अमृत महोत्सव पूरे देश में मनाया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), डिंडोरी ने 20 मई 2021 को संध्या 4.00 बजे से 5.30 बजे तक "भारत का अमृत महोत्सव" के हिस्से के रूप में ग्रामीण आय और मधुमक्खी पालन के विषय के साथ गूगल मीट पर वर्चुअल आनलाईन कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया।गीता सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख (प्रभारी), केवीके, डिंडोरी के नेतृत्व में केवीके की समर्पित टीम ने पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को मधुमक्खी पालन के लिये प्रेरित किया।
डॉ. सतेंद्र कुमार, वैज्ञानिक (मत्स्य पालन) ने "“ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन से लाभ व आमदनी का वैकल्पिक श्रोत”" पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन किया। उन्होंने कृषि उत्पादन/उत्पादकता बढ़ाने में मधुमक्खियों की भूमिका, आर्थिक उद्यम के रूप में मधुमक्खी पालन, शहद के उत्पादन और प्रसंस्करण, मधुमक्खी पालन के उप-उत्पादों से आय और मानव स्वास्थ्य में शहद के महत्व पर किसानों को आव्श्यक जानकारी प्रदान की । डॉ. कुमार ने मेहदवानी तहसील, डिंडोरी के सारसढोली गांव के केवीके प्रशिक्षित स्थानीय भूमिहीन ग्रामीण युवा भरत कुशवाहा की सफलता की कहानी भी किसानो से साझा की, जिसने मधुमक्खी पालन में उद्यमिता के माध्यम से अपना जीवन बदल दिया। आज भरत कुशवाहा स्थानीय ग्रामीण युवाओ के लिये प्रेरणा श्रोत है।
किसानो ने कृषि उत्पादन/उत्पादकता बढ़ाने में मधुमक्खियों की भूमिका समझा और जैविक को अपन्नाने की आवश्कता को मह्शूस किया । अवधेश पटेल, कार्यक्रम सहायक (बागवानी) और श्वेता मसराम, पीए (एग्रोनॉमी) ने किसानों को मधुमक्खी पालन से संबंधित अपने मुद्दों को विशेषज्ञों से सुझावों और सलाह के लिए वर्चुअल आनलाईन प्रश्न पुछने मे सहायता प्रदान की। वर्चुअल मीटिंग के दौरान रेणु पाठक, तकनीकी अधीकारी (कम्प्युतर) द्वारा मल्टीमीडिया और इंटरनेट से संबंधित कार्यों मे सह्योग किया गया। चार अधिकारियों के साथ कुल 32 किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया।
